गैंगस्टर के धमकी-अपहरण से हासिल 91 जमीनों पर ईडी की सख्त कार्रवाई, पीएमएलए कोर्ट में शिकायत दाखिल और जब्ती की मांग

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नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत दिवंगत गैंगस्टर ख्वाजा नईमुद्दीन उर्फ नईम और उसके परिवार के सदस्यों तथा सहयोगियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत (प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट) दायर की है। यह शिकायत माननीय एमएसजे कोर्ट, रंगारेड्डी जिले, तेलंगाना में दाखिल की गई, जिसका कोर्ट ने 21 जनवरी 2026 को संज्ञान लिया।

शिकायत में पाशम श्रीनिवास, हसीना बेगम, मोहम्मद ताहिरा बेगम, मोहम्मद सलीमा बेगम, मोहम्मद अब्दुल सलीम, अहेला बेगम, सैयद नीलोफर, फिरदौस अंजुम, मोहम्मद आरिफ और हीना कौसर को आरोपी बनाया गया है। ईडी ने जांच में पाया कि नईमुद्दीन और उसके साथी जबरन लोगों की जमीनें हड़पते थे। वे संपत्तियों की पहचान करते, मालिकों को जान से मारने की धमकी देते, अपहरण करते और दबाव में सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में जबरन बिक्री विलेख पंजीकृत करवाते थे। विक्रेताओं को कोई पैसा नहीं मिलता था, और वे डर से पुलिस में शिकायत भी नहीं कर पाते थे।

ईडी की जांच तेलंगाना पुलिस की एफआईआर पर आधारित है, जिसमें मोहम्मद अब्दुल फहीम, हसीना बेगम, पाशम श्रीनिवास, मोहम्मद अब्दुल नासिर, थुम्मा श्रीनिवास, बी. श्रवण कुमार और सतीश रेड्डी आरोपी थे। आयकर विभाग से भी जानकारी मिली, जहां बेनामी संपत्ति और लेनदेन निषेध अधिनियम, 1988 के तहत नईमुद्दीन, हसीना बेगम, ताहिरा बेगम आदि के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। तेलंगाना सरकार के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने भी नईमुद्दीन की अवैध संपत्तियों की जांच की थी।

जांच में सामने आया कि नईमुद्दीन के करीबी पाशम श्रीनिवास ने उसके परिवार और साथियों के नाम पर जमीनें जबरन रजिस्टर करवाईं। कुल 91 संपत्तियां जबरन नईमुद्दीन के परिवार और सहयोगियों के नाम पर पंजीकृत की गईं। ये संपत्तियां पीएमएलए के तहत अपराध की कमाई मानी गई हैं और केंद्र सरकार द्वारा जब्त करने योग्य हैं। हालांकि, ये पहले ही आयकर विभाग द्वारा बेनामी एक्ट के तहत अटैच हो चुकी हैं, इसलिए ईडी ने दोबारा अटैच नहीं किया, लेकिन शिकायत में इनकी जब्ती की मांग की गई है।

नईमुद्दीन (ख्वाजा नईमुद्दीन उर्फ नईम) हैदराबाद का कुख्यात गैंगस्टर था, जिसकी 2016 में पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी। उसके गिरोह ने जमीन हड़पने, अपहरण, धमकी और अन्य अपराधों से संपत्तियां जमा कीं, जिनकी वैल्यू सैकड़ों करोड़ में बताई जाती है। ईडी की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने और अपराध की कमाई जब्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।