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गांव वालों ने ताने मारे, माता-पिता और कोच ने भरोसा किया, पोल वॉल्ट में ब्रॉन्ज जीतकर भावुक हुईं बारानिका इलांगोवन

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नागोया, 26 सितंबर (आईएएनएस)। एशियन गेम्स 2026 में शुक्रवार को बारानिका इलांगोवन ने पोल वॉल्ट में देश को ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल दिलाया। हालांकि, यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। बारानिका ने जब पोल वॉल्ट शुरू किया, तो उनके गांव के लोगों ने सवाल उठाया कि क्या यह खेल जोखिम उठाने लायक है। उन्होंने उनके माता-पिता से यह भी कहा कि अगर उन्हें चोट लग गई तो कोई उनसे शादी नहीं करेगा।

वर्षों बाद 24 साल की यह भारतीय एथलीट नागोया में एशियन गेम्स के पोडियम पर खड़ी थीं, जहां उन्होंने महिलाओं के पोल वॉल्ट में 4.20 मीटर की ऊंचाई पार करके ब्रॉन्ज मेडल जीता। तमिलनाडु के मयिलादुथुरै जिले के कुथलम गांव से आने वाली इलांगोवन ने 2019 में एसीएल की चोट के बावजूद पोल वॉल्टिंग जारी रखी। उन्होंने कहा कि यह मेडल उनके माता-पिता के भरोसे, उनके कोच के विश्वास और एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) से मिले समर्थन का नतीजा है।

इलांगोवन ने ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद ‘आईएएनएस’ को बताया, “मैं एक गांव से आती हूं। जब मैंने शुरुआत की, तो 2019 में वॉल्टिंग के दौरान चोट लगने के बाद मेरी एसीएल सर्जरी हुई थी। उस समय हर कोई मेरे माता-पिता से कह रहा था, लड़की को पोल वॉल्ट में हिस्सा क्यों लेने दे रहे हो? यह इवेंट काफी जोखिम भरा है। अगर उसे कुछ हो गया, तो कोई उससे शादी नहीं करेगा।”

बारानिका ने कहा, “वे हमारी पीठ पीछे बातें कर रहे थे मगर मेरे मम्मी-पापा को मुझ पर भरोसा था। उन्होंने कोच से साफ-साफ बात की। मेरे कोच को मेरी काबिलियत पर भरोसा था। उन्होंने उनसे कहा, ‘वह आपकी सोच से कहीं ज्यादा कर दिखाएगी। वह निश्चित रूप से खेल में नाम कमाएगी।’ मैं उनका भी शुक्रिया अदा करना चाहती हूं, क्योंकि उन्होंने दूसरों की बात नहीं सुनी। उन्होंने मुझ पर भरोसा किया।”

इस नतीजे की अहमियत इसलिए और बढ़ गई, क्योंकि इलांगोवन को उम्मीद नहीं थी कि उन्होंने मेडल जीत लिया है। कजाकिस्तान की एक और एथलीट के भी तीसरे स्थान पर रहने के कारण, उन्हें शुरू में पता ही नहीं चला कि उनका प्रदर्शन पोडियम तक पहुंचने के लिए काफी था।

“मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि मैंने मेडल जीत लिया है। मेरी साथी एथलीट मेरे पास आई और कहा, ‘तुम ब्रॉन्ज मेडल की हकदार हो, तुमने इसे जीत लिया है।'” ब्रॉन्ज मेडल साझा करने वाले एक और एथलीट थे, जो कजाकिस्तान के थे। मेरे साथी ने मुझे बताया कि मैं ब्रॉन्ज मेडल के लिए तीसरे स्थान पर रही। मुझे इसके बारे में तभी पता चला। मैं पर्सनल बेस्ट का लक्ष्य बना रही थी, लेकिन असल में मुझे मेडल मिला।”

एलांगोवन ने प्रतियोगिता से पहले वहां के माहौल में ढलने में मदद के लिए एएफआई की ओर से पोल ले जाने और जापान में तैयारी के इंतजामों का भी श्रेय दिया। उन्होंने कहा, “इस बार, एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने हमारे पोल ले जाने के लिए हर एयरलाइन के साथ हर संभव कोशिश की, और उन्होंने इसे सच में मुमकिन कर दिखाया। मैं एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया का भी शुक्रिया अदा करना चाहती हूं। उन्हीं की वजह से मैं यह मेडल जीत सकी। एशियन गेम्स से एक हफ्ते पहले सुगुपा यूनिवर्सिटी में एक तैयारी कैंप लगा था, जिससे मुझे वहां के माहौल, समय, खाने और रिकवरी के हिसाब से ढलने में मदद मिली। उन्होंने हमारे लिए सब कुछ व्यवस्थित किया, और यह वाकई बहुत अच्छा था।”