ग्रेटर नोएडा, 4 अगस्त (आईएएनएस)। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में गौतमबुद्धनगर के निजी विद्यालयों की फीस वृद्धि को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। समिति ने उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 के उल्लंघन के मामले में सात निजी विद्यालयों पर कुल 7 लाख रुपये का अर्थदंड लगाने का निर्णय लिया है।
यह कार्रवाई शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए निर्धारित शुल्क वृद्धि सीमा से अधिक फीस वसूलने तथा नियमों का पालन न करने के कारण की गई है। बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई, जिसमें निजी विद्यालयों द्वारा किए गए शुल्क निर्धारण, फीस वृद्धि और अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन की विस्तार से समीक्षा की गई।
समीक्षा के दौरान समिति ने पाया कि छह विद्यालयों ने सरकार द्वारा निर्धारित अधिकतम 7.23 प्रतिशत की सीमा से अधिक फीस बढ़ाई है। वहीं एक विद्यालय ने कम्पोजिट फीस के अतिरिक्त अलग से एनुअल चार्ज भी वसूला, जो शुल्क विनियमन अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है।
जिला शुल्क नियामक समिति ने बताया कि संबंधित विद्यालयों को पहले ही कुल 45 नोटिस जारी कर नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद सात विद्यालयों ने निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क वृद्धि कर अधिनियम का उल्लंघन किया। इसे प्रथम बार का उल्लंघन मानते हुए समिति ने प्रत्येक विद्यालय पर एक-एक लाख रुपए का अर्थदंड लगाने का निर्णय लिया।
जिन विद्यालयों पर कार्रवाई की गई है, उनमें सेक्टर-16 नोएडा स्थित एपीजे स्कूल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-20 स्थित स्पर्श ग्लोबल स्कूल, सेक्टर-50 नोएडा का रामाज्ञा स्कूल, सेक्टर-28 नोएडा का विश्व भारती स्कूल, गौर सिटी ग्रेटर नोएडा स्थित श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल तथा ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-2 स्थित सेंट जॉन्स स्कूल शामिल हैं। इन सभी विद्यालयों पर निर्धारित 7.23 प्रतिशत की सीमा से अधिक फीस बढ़ाने के कारण एक-एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
इसके अलावा, सेक्टर-21 नोएडा स्थित बाल भारती पब्लिक स्कूल पर भी एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। समिति की जांच में सामने आया कि विद्यालय ने शैक्षिक वर्ष 2025-26 का फीस स्ट्रक्चर अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया था। साथ ही कम्पोजिट फीस के अतिरिक्त अलग से एनुअल चार्ज भी लिया जा रहा था, जिसे शुल्क विनियमन अधिनियम का उल्लंघन माना गया।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 के तहत शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए अधिकतम 7.23 प्रतिशत तक ही फीस वृद्धि की अनुमति है। इससे अधिक शुल्क वृद्धि करने वाले विद्यालयों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन ने सभी निजी विद्यालयों को अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं और चेतावनी दी है कि भविष्य में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

