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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक में कई बड़े फैसले, श्रमिक आवास से लेकर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी तक को मिली मंजूरी

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ग्रेटर नोएडा, 3 सितंबर (आईएएनएस)। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक में शहर के विकास, कनेक्टिविटी, श्रमिकों की आवासीय जरूरतों, शिक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। बैठक में अप्रवासी श्रमिकों के लिए ईडब्ल्यूएस आवास और ट्रांजिट हॉस्टल बनाने, सेक्टर अल्फा-1 में सार्वजनिक पुस्तकालय विकसित करने, ग्रेटर नोएडा को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से बेहतर तरीके से जोड़ने समेत कई फैसले लिए गए।

बैठक में यह भी तय किया गया कि रिठौरी गांव में रेलवे लाइन के ऊपर फुटओवर ब्रिज बनाया जाएगा। वहीं आवासीय भूखंडों पर निर्माण पूरा करने और कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र लेने के लिए आवंटियों को 30 जून 2028 तक अंतिम अवसर दिया गया है। इसके अलावा एनडीआरएफ के रीजनल रिस्पांस सेंटर के लिए ओमीक्रॉन-1ए में 30 फ्लैट निशुल्क उपलब्ध कराने तथा ग्रेटर नोएडा की सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग व्यवस्था को मजबूत करने का निर्णय लिया गया। औद्योगिक गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में दूसरे जिलों और राज्यों से श्रमिक ग्रेटर नोएडा आते हैं। ऐसे श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर एवं सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के लिए प्राधिकरण पतवाड़ी और बिरौंडी गांव में ईडब्ल्यूएस फ्लैट विकसित करेगा।

इसके लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है और सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इसी वर्ष के अंत तक निर्माण शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही सेक्टर ईकोटेक-6 और ईकोटेक-11 में 3000-3000 वर्ग मीटर भूमि ट्रांजिट लेबर हॉस्टल के लिए चिन्हित की गई है। प्राधिकरण यह जमीन श्रम विभाग को निशुल्क हस्तांतरित करेगा। हॉस्टल का निर्माण श्रम विभाग करेगा। यहां रोजगार की तलाश में आने वाले अप्रवासी श्रमिक कम किराये पर अस्थायी आवास प्राप्त कर सकेंगे। बोर्ड बैठक में सेक्टर अल्फा-1 में 1360 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में सार्वजनिक पुस्तकालय बनाने को भी मंजूरी दी गई। इसमें 440 वर्ग मीटर क्षेत्र में तीन मंजिला लाइब्रेरी होगी, जबकि शेष हिस्से में पार्किंग, शौचालय और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

पुस्तकालय में बच्चों, छात्रों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए किताबें उपलब्ध रहेंगी। आर्थिक रूप से कमजोर छात्र न्यूनतम शुल्क देकर किताबें इश्यू करा सकेंगे और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे। इसका निर्माण भी इस साल के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य है। ग्रेटर नोएडा की 130 मीटर चौड़ी सड़क को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना को भी बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। पहले चरण में एक मूर्ति तक डबल डेकर सड़क बनाई जाएगी। इसकी अनुमानित लागत 756.01 करोड़ रुपए होगी। दूसरे चरण में शेष हिस्से का निर्माण किया जाएगा। एनएचएआई के सर्वेक्षण में इस कनेक्टिविटी के लिए दो वैकल्पिक मार्ग सामने आए थे।

समिति ने पहले चरण में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से एक मूर्ति तक डबल डेकर सड़क बनाने का फैसला किया है। परियोजना की लागत यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद प्राधिकरणों द्वारा समान रूप से वहन की जाएगी। इससे ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे तक पहुंच आसान होगी। कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए 105 मीटर चौड़ी सड़क को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जोड़ने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। फेस-1 में इस सड़क का करीब छह किलोमीटर हिस्सा पहले ही बन चुका है। अब फेस-2 में जुनपत गांव से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक करीब 12 किलोमीटर सड़क बनाई जाएगी।

यह सड़क 10 लेन और चार सर्विस लेन की होगी। मार्ग में रेलवे लाइन, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर लिंक लाइन और जीटी रोड पड़ेंगे, जहां तीन ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। सड़क निर्माण का खर्च एनएचएआई उठाएगा, जबकि आवश्यक भूमि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण उपलब्ध कराएगा। डीएनजीआईआर क्षेत्र में आने वाली भूमि का अधिग्रहण नोएडा प्राधिकरण करेगा और भूमि अधिग्रहण की लागत दोनों प्राधिकरण 50:50 के अनुपात में वहन करेंगे। रिठौरी गांव के लोगों को रेलवे लाइन पार करने में होने वाली परेशानी को देखते हुए फुटओवर ब्रिज बनाने का फैसला किया गया है। इस ब्रिज में रैंप, सीढ़ियों और लिफ्ट की सुविधा होगी। वर्ष 2022 में सांसद डॉ. महेश शर्मा के पत्र के बाद इस दिशा में प्रक्रिया शुरू हुई थी।

प्राधिकरण और डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की टीम ने संयुक्त निरीक्षण के बाद निर्माण पर सहमति जताई। निर्माण का खर्च ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण उठाएगा और रेलवे से आवश्यक स्वीकृति एवं एनओसी ली जाएगी। आवासीय भूखंडों के आवंटियों को भवन निर्माण पूरा करने और कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए 30 जून 2028 तक अतिरिक्त समय दिया गया है। यह अंतिम अवसर वर्तमान प्रचलित विलंब शुल्क के साथ दिया गया है। तय अवधि तक कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं करने वाले आवंटियों का आवंटन रद्द किया जा सकता है।

आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में राहत-बचाव कार्यों को तेज करने के उद्देश्य से ओमीक्रॉन-1ए में एनडीआरएफ की आठवीं वाहिनी, गाजियाबाद के रीजनल रिस्पांस सेंटर के लिए 30 फ्लैट नि:शुल्क उपलब्ध कराने का फैसला लिया गया है। इनका इस्तेमाल टीम के कैंप, परिसर और स्टाफ कार्यालय के रूप में होगा। कर्मियों की तैनाती रोटेशन के आधार पर होगी। इससे बाढ़, औद्योगिक दुर्घटना, भवन गिरने और प्राकृतिक आपदाओं जैसी परिस्थितियों में एनडीआरएफ की त्वरित कार्रवाई में मदद मिलेगी।

वायु गुणवत्ता सुधारने और सड़कों पर धूल-मिट्टी नियंत्रित करने के लिए ग्रेटर नोएडा सेंट्रल और ईस्ट जोन में पांच साल तक मैकेनिकल रोड स्वीपिंग कराई जाएगी। सीएक्यूएम और आईआईटी रुड़की के सुझावों के आधार पर इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। प्राधिकरण मशीनरी उपलब्ध कराएगा, जबकि संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी चयनित कॉन्ट्रैक्टर की होगी।

बैठक में चेयरमैन दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार, नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश समेत विभिन्न वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।