ग्रीस में भारत के राजदूत नियुक्त किए गए 1995 बैच के आईएफएस अधिकारी रविशंकर

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नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। 1995 बैच के आईएफएस अधिकारी रवि शंकर को ग्रीस में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। फिलहाल वह यूक्रेन में भारत के राजदूत के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी साझा की और बताया कि वह जल्दी ही अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

यूक्रेन में भारतीय राजदूत रविशंकर ग्रीस में रुद्रेंद्र टंडन की जगह लेंगे। रविशंकर जून 2023 से ग्रीस में राजदूत के रूप में काम कर रहे हैं। रविशंकर ने पहले भी कई अहम पदों पर जिम्मेदारी निभाई है। अगस्त 2024 में उन्हें यूक्रेन में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया था।

उन्होंने युगांडा में 2017–2020 तक भारत के हाई कमिश्नर के तौर पर काम किया है। युगांडा में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्हें एक साथ बुरुंडी में राजदूत और रवांडा में हाई कमिश्नर के तौर पर भी नियुक्त किया गया था।

2013 से लेकर 2016 तक उन्होंने इटली में भारतीय दूतावास में सेवा दी। उन्होंने 2009-2012 तक हनोई, वियतनाम में, 2000 से लेकर 2004 तक ट्यूनिस, ट्यूनीशिया में और 1997 से लेकर 2000 तक पेरिस, फ्रांस में भारतीय मिशनों में काम किया है।

इसके अलावा, 2022 से 2024 तक विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (दक्षिण) के तौर पर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए जिम्मेदार डिवीजन के प्रमुख रहे। प्रेसिडेंट के सेक्रेटेरिएट में 2020 से 2022 तक भारत के राष्ट्रपति के संयुक्त सचिव-कम-सोशल सेक्रेटरी के तौर पर काम किया।

2020 में बहुपक्षीय आर्थिक संबंध के मामले में कुछ समय के लिए एनईआर डिवीजन को हेड किया। 2006 से लेकर 2009 तक विदेश राज्य मंत्री के चीफ स्टाफ ऑफिसर रहे।

भारत और ग्रीस के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध मई 1950 में स्थापित हुए थे। ग्रीस ने कश्मीर मुद्दे पर भारत के रुख और यूएएससी में भारत की स्थायी सदस्यता का हमेशा समर्थन किया है। वहीं, भारत ने साइप्रस मुद्दे पर ग्रीस के पक्ष का समर्थन किया है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2023 में ग्रीस की यात्रा की थी। इस दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदला। इसके बाद फरवरी 2026 में ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोटाकिस ने भारत का दौरा किया।

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ग्रीस के रक्षा मंत्री निकोलाओस डेंडियास ने हाल ही में 9 फरवरी, 2026 को रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए एक संयुक्त आशय घोषणापत्र (जेडीआई) पर हस्ताक्षर किए।