Tuesday, June 30, 2026
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गुजरात का जामनसोढा प्राथमिक स्कूल: हरियाली के बीच शिक्षा की नई मिसाल, प्रकृति से जुड़कर बच्चों को मिल रहा सीखने का अवसर

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डांग, 29 जून (आईएएनएस)। गुजरात के डांग जिले के सुबीर तालुका स्थित जामनसोढा प्राथमिक स्कूल शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के अनूठे संगम का उदाहरण बनकर उभरा है। नई शिक्षा नीति (एनईपी) के उद्देश्यों को धरातल पर उतारते हुए इस स्कूल में बच्चों को हरे-भरे, स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त वातावरण में शिक्षा दी जा रही है। स्कूल का उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना और स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करना भी है।

स्कूल परिसर में हरियाली को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे लगाए गए हैं। स्कूल की इमारत, कक्षाओं और पूरे कैंपस को इस तरह विकसित किया गया है कि बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ प्राकृतिक वातावरण का अनुभव भी हो। स्वच्छ हवा, पर्याप्त ऑक्सीजन और शांत माहौल बच्चों की एकाग्रता बढ़ाने के साथ-साथ उनके शारीरिक और मानसिक विकास में भी मदद कर रहा है।

जामनसोढा प्राथमिक स्कूल के शिक्षक राजेशभाई टंडेल ने बताया कि विद्यालय में हरियाली बढ़ाने का अभियान ग्रामीणों के सहयोग से शुरू किया गया। गांव के लोगों ने पौधारोपण में सक्रिय भागीदारी निभाई, जिसके परिणामस्वरूप स्कूल परिसर में अनेक प्रजातियों के पेड़ लगाए गए हैं। कक्षाओं में इंडोर प्लांट और विशेष रूप से स्नेक प्लांट लगाए गए हैं, जो वातावरण को शुद्ध रखने और ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं। इस पहल से बच्चों को स्वच्छ हवा मिलने के साथ-साथ उनमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी विकसित हो रही है।

स्कूल की बिल्डिंग हो या क्लास रूम या फिर स्कूल का कैंपस हर जगह पर अलग-अलग प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक इससे जहां पढ़ाई के दौरान बच्चों को स्वच्छ वातावरण मिलता है, वहीं उन्हें प्रकृति का संरक्षण करने की प्रेरणा भी मिलती है। इसका सकारात्मक प्रभाव बच्चों की सेहत, एकाग्रता और सीखने की क्षमता पर भी दिख रहा है, साथ ही स्कूल आने को लेकर उनका उत्साह बढ़ रहा है और ड्रॉपआउट रेट कम करने में भी मदद मिल रही है।

जामनसोढा गांव के सरपंच वसंतभाई ने बताया कि इस पहल के बाद बच्चों में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ी है। बेहतर वातावरण के कारण छात्र नियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं। शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने का यह प्रयास भविष्य की पीढ़ी के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।

विद्यालय में बच्चों को रीसाइक्लिंग, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी व्यावहारिक गतिविधियों में भी शामिल किया जाता है। ‘बेस्ट फ्रॉम वेस्ट’ जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को बेकार वस्तुओं का रचनात्मक उपयोग करना सिखाया जाता है, जिससे उनमें नवाचार और रचनात्मक सोच विकसित होती है। स्कूल की एक और खास पहचान इसकी आकर्षक लाइब्रेरी है। सागौन की लकड़ी पर सुंदर नक्काशी से तैयार इस पुस्तकालय का वातावरण बच्चों को पुस्तकों की ओर आकर्षित करता है। यहां विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करने और ज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाता है।

कुल मिलाकर, डांग के इस स्कूल में स्टूडेंट्स की पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अनुशासन, नेतृत्व, जिम्मेदारी और संस्कार के साथ उनका संपूर्ण विकास किया जा रहा है।