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हार का ठीकरा ईवीएम और चुनाव आयोग पर फोड़ता है विपक्ष: भाजपा नेता अशोक बाजपेयी

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नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाजपा नेता अशोक बाजपेयी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले, चुनाव आयोग और ईवीएम को लेकर विपक्ष के आरोपों, साक्षी महाराज के बयान, भारत-पाकिस्तान संबंधों पर मणिशंकर अय्यर की टिप्पणियों और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस-सपा के बीच सीट-शेयरिंग को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विपक्षी दलों पर चुनावी हार के लिए ईवीएम और निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाया।

अशोक बाजपेयी ने कहा कि लगातार चुनावों में हार के बाद विपक्षी दल हताशा और निराशा में अपनी हार का ठीकरा कभी ईवीएम तो कभी निर्वाचन आयोग पर फोड़ते हैं। जिन राज्यों में विपक्षी दल चुनाव जीतते हैं, वहां ईवीएम और निर्वाचन आयोग दोनों उन्हें निष्पक्ष नजर आते हैं, लेकिन जहां भाजपा जीतती है, वहां इन्हीं संस्थाओं पर सवाल उठाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की जीत विपक्ष को परेशान करती है, जबकि केरल और तमिलनाडु में विपक्ष की सरकार बनने पर उसे ईवीएम या चुनाव आयोग से कोई शिकायत नहीं होती। चुनाव के बाद जनता के बीच अपनी हार का जवाब देने के बजाय विपक्ष के लिए ईवीएम और निर्वाचन आयोग को निशाना बनाना आसान रास्ता बन गया है।

साक्षी महाराज के बयान का समर्थन करते हुए अशोक बाजपेयी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने पहली बार लोकसभा में 37 सीटें जीती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ईवीएम ठीक नहीं होती तो समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में 37 सीटें कैसे जीतती और कांग्रेस अपना खाता कैसे खोलती। विपक्षी दल अपनी चुनावी हार की खीझ मिटाने के लिए लगातार निर्वाचन आयोग को निशाना बना रहे हैं।

सीईसी ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने से जुड़ी मांग पर सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर भाजपा नेता ने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में हस्तक्षेप किया है और अपना निर्णय दिया है। ऐसे में इस पर ज्यादा चर्चा की जरूरत नहीं रह जाती। विपक्ष के नेता जिस तरह की मांग कर रहे हैं, वह अमर्यादित है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में तथ्यों के आधार पर निर्णय करेगा और केवल अखबारी खबरों के आधार पर नहीं चलेगा।

अशोक बाजपेयी ने विपक्ष पर देश और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा गिराने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब देश का नाम और सम्मान बढ़ता है तो विपक्षी नेताओं को परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि देश के एक वीर सपूत ने साहसिक काम किया, लेकिन विपक्ष के पास उसकी सराहना में दो शब्द कहने तक का समय नहीं है।

भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की टिप्पणियों पर अशोक बाजपेयी ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को यह विचार करना चाहिए कि भारत ने पाकिस्तान से बातचीत क्यों बंद की। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान लगातार भारतीय नागरिकों की हत्या और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता रहा है, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने पाकिस्तान की निंदा करने के बजाय भारत को उससे बातचीत करने की वकालत की। इसे उन्होंने कांग्रेस का दोहरा चरित्र बताया और कहा कि कांग्रेस के कारण ही देश का विभाजन हुआ।

असदुद्दीन ओवैसी की ओर से अखिलेश यादव पर की गई टिप्पणी के संदर्भ में भाजपा नेता ने कहा कि ओवैसी का यह उनका राजनीतिक फैसला है। हालांकि, उन्होंने इस आरोप को सही बताया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने मुस्लिमों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि इन दलों ने मुस्लिम समाज के कल्याण और बेहतरी के लिए काम करने के बजाय भाजपा का भय दिखाकर उन्हें अपने पक्ष में लामबंद किया और उनका वोट लिया।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट-शेयरिंग को लेकर अशोक बाजपेयी ने कहा कि दोनों दलों के बीच सिर्फ मतभेद ही नहीं बल्कि मनभेद और कई तरह के विभेद भी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच न तो वैचारिक और न ही संगठनात्मक सामंजस्य है। दोनों पार्टियों का गठबंधन केवल सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से होता है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच पहले भी कई बार गठबंधन हुआ है, लेकिन एक चुनाव के बाद गठबंधन टूट गया और दूसरे चुनाव में फिर साथ आ गए।

बाजपेयी ने यह दावा किया कि जनता भी समझ चुकी है कि यह गठबंधन केवल वोट की राजनीति और सत्ता हासिल करने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार दोबारा बनने जा रही है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है।