उत्तराखंड, 18 अगस्त (आईएएनएस)। देवभूमि उत्तराखंड के कण-कण में शिव का वास है और हर पत्थर पर कोई न कोई कथा अंकित है। ऐसी ही एक प्राचीन और पौराणिक कथा से जुड़ा है हरिद्वार के पवित्र शहर कनखल में स्थित पवित्र ‘दक्ष प्रजापति महादेव मंदिर’। यह स्थान माता सती के आत्मदाह और भगवान शिव के क्रोध से जुड़ी ऐतिहासिक घटना का मुख्य केंद्र माना जाता है।
इस मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है, यहां आने वाला हर श्रद्धालु भगवान शिव के रौद्र और शांत दोनों रूपों का अनुभव करता है।
मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की भव्यता का बखान किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का भव्य वीडियो पोस्ट किया, जिसके साथ उन्होंने लिखा, “हरिद्वार के पवित्र शहर कनखल में स्थित पवित्र दक्ष प्रजापति महादेव मंदिर, भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था और भक्ति का एक दिव्य केंद्र है। राजा दक्ष प्रजापति से जुड़ा यह प्राचीन तीर्थ स्थल सावन के महीने में शिव भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। अगर आप हरिद्वार जा रहे हैं, तो दक्ष प्रजापति महादेव मंदिर में जरूर दर्शन करें और भगवान शिव का आशीर्वाद लें।”
यह मंदिर न सिर्फ भगवान शिव की आराधना का केंद्र है, बल्कि उस प्रसिद्ध घटना का भी साक्षी है जिसने सृष्टि की दिशा बदल दी थी। पौराणिक कहानी के अनुसार,
राजा दक्ष प्रजापति ने यहां एक विशाल यज्ञ किया था, जिसमें भगवान शिव और माता सती को आमंत्रित नहीं किया गया था। अपमानित महसूस करने पर माता सती उसी यज्ञ कुंड में आत्मदाह कर दिया था। इसी घटना के बाद भगवान शिव ने तांडव किया और विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 टुकड़े किए, जिससे देशभर में 51 शक्तिपीठों का निर्माण हुआ। दक्ष प्रजापति महादेव मंदिर शिवभक्तों के लिए आस्था का प्रतीक है।
मंदिर परिसर के पास ही वह पवित्र स्थान है जहां माता सती ने योगाग्नि से शरीर त्यागा था। वर्तमान मंदिर का निर्माण सन 1810 में रानी धनकौर द्वारा कराया गया था और 1962 में इसका पुनर्निर्माण हुआ। महाशिवरात्रि और सावन के पवित्र महीने में यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है, क्योंकि मान्यता है कि सावन में शिवजी यहीं निवास करते हैं।

