SGSU Advertisement
Home राजनीति हिमाचल में नए जिले बनाने की कवायद तेज, रिटायर्ड जस्टिस धर्म चंद...

हिमाचल में नए जिले बनाने की कवायद तेज, रिटायर्ड जस्टिस धर्म चंद चौधरी की अध्यक्षता में आयोग गठित

0
4

शिमला, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश में नए जिले बनाने की कवायद तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए चार सदस्यीय आयोग का गठन कर दिया है।

सामान्य प्रशासन विभाग ने 14 अक्टूबर को इसकी अधिसूचना जारी कर दी।

जारी अधिसूचना के अनुसार, इस आयोग की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रिटायर्ड जस्टिस धर्म चंद चौधरी करेंगे। आयोग में दो अन्य सदस्यों के तौर पर एडवोकेट विशाल पंवार और सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी राजेश शर्मा को शामिल किया गया है, जबकि निदेशक भू-अभिलेख को आयोग का सदस्य सचिव बनाया गया है। आयोग का मुख्यालय शिमला में रहेगा।

आयोग प्रदेश में मौजूदा प्रशासनिक ढांचे यानी जिलों, उप-मंडलों, तहसीलों और विकास खंडों की मौजूदा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा करेगा। समीक्षा के बाद आयोग को यह सिफारिश करनी होगी कि कहां नए जिले, उप-मंडल या तहसीलें बनाना जरूरी है और कहां मौजूदा इकाइयों को आपस में मिलाने या विभाजित करने की आवश्यकता है।

अधिसूचना में कहा गया है कि आयोग अपनी सिफारिशें देते समय कई महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखेगा। इसमें प्रदेश की जनसंख्या, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, आम जनता की प्रशासन तक पहुंच और प्रशासनिक सुविधा को प्रमुखता दी जाएगी।

इसके अलावा, आयोग को यह भी आकलन करना होगा कि नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने पर सरकार पर कितना वित्तीय बोझ पड़ेगा और कम से कम खर्च में प्रशासनिक व्यवस्था को कैसे अधिक प्रभावी और जन-हितैषी बनाया जा सकता है।

सरकार ने इस कार्य को पूरा करने के लिए आयोग को छह महीने का समय दिया है। छह महीने के भीतर आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी। आयोग के कामकाज में सहयोग के लिए राजस्व विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को जरूरी रिकॉर्ड, नक्शे, आंकड़े और कर्मचारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

बता दें कि हिमाचल प्रदेश में इस समय 12 जिले हैं। प्रदेश के कई क्षेत्रों से लंबे समय से नए जिले बनाने की मांग उठ रही है। इसमें देहरा गोपीपुर, नूरपुर, सुंदरनगर, पालमपुर, रोहड़ू और अनी जैसे क्षेत्रों को जिला बनाने की मांग प्रमुख है। लोगों का तर्क है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उन्हें जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उनके कामकाज में देरी होती है।