काबुल, 28 जुलाई (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (यूनामा) ने मंगलवार को बताया कि एक अप्रैल से 30 जून के बीच अफगानिस्तान में सीमा पार हुई सशस्त्र हिंसा में 57 लोगों की मौत हुई और 342 लोग घायल हुए।
अपनी रिपोर्ट में ‘यूनामा’ ने कहा कि हवाई हमले और जमीनी स्तर पर हुई गोलीबारी आम लोगों के हताहत होने की सबसे बड़ी वजह रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान सीमा पार हुई हिंसा में दर्ज सभी नागरिक हताहतों के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बल जिम्मेदार थे।
अप्रैल से जून के बीच नागरिक हताहतों पर जारी अपडेट के अनुसार, प्रभावित लोगों में 112 बच्चे (26 की मौत और 86 घायल) और 40 महिलाएं (6 की मौत और 34 घायल) शामिल थीं।
‘यूनामा’ ने कहा, “सबसे ज्यादा 28 जून को पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ओर से किए गए हवाई हमलों में नागरिक हताहत हुए। इसके बाद 27 से 29 अप्रैल के बीच कुनार प्रांत में हुई गोलाबारी में भी कई लोग प्रभावित हुए।”
पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ा है। दोनों देशों के बीच कई बार गोलीबारी हुई है, जिससे आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ गई है।
15 जुलाई को अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने पाकिस्तान के हालिया हमलों के बाद संभावित युद्ध अपराधों की निष्पक्ष जांच की मांग की। संगठन ने इन हमलों में आम लोगों के हताहत होने पर गहरी चिंता जताई।
एचआरडब्ल्यू ने कहा कि सिर्फ नागरिकों के हताहत होने से यह साबित नहीं होता कि युद्ध के कानूनों का उल्लंघन हुआ है। लेकिन आम लोगों की मौत की खबरें इस बात की जरूरत जरूर दिखाती हैं कि हमला करने वाले और बचाव करने वाले, दोनों पक्षों की ओर से संभावित युद्ध अपराधों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
एचआरडब्ल्यू ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के मुताबिक, लड़ाई में शामिल सभी पक्षों की जिम्मेदारी है कि वे आम लोगों को कम से कम नुकसान पहुंचे, इसके लिए हर संभव सावधानी बरतें। हमला करने वाले पक्ष को हमेशा यह साफ पहचान करनी चाहिए कि कौन आम नागरिक और नागरिक ठिकाने हैं, और कौन लड़ाके या सैन्य ठिकाने हैं। हमला सिर्फ सैन्य ठिकानों पर ही होना चाहिए।”
संगठन ने आगे कहा, “बचाव करने वाले पक्ष की भी जिम्मेदारी है कि वह अपनी क्षमता के अनुसार अपने नियंत्रण वाले इलाकों में रहने वाले आम लोगों की सुरक्षा करे। इसमें यह भी शामिल है कि सैन्य ठिकानों को घनी आबादी वाले इलाकों के पास न रखा जाए। हालांकि, अगर एक पक्ष नियमों का उल्लंघन करता है, तो इससे दूसरे पक्ष की अपनी जिम्मेदारियां खत्म नहीं हो जातीं।”

