तिरुवनंतपुरम, 7 जुलाई (आईएएनएस)। केरल सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन के बेटे वीए अरुण कुमार को इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन रिसोर्सेज डेवलपमेंट (आईएचआरडी) के निदेशक पद से हटा दिया है। उनके कार्यकाल को लेकर उनकी पात्रता पर लंबे समय से विवाद चल रहा था।
सरकार ने आईएचआरडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पूंजार के प्राचार्य प्रो. एमवी राजेश को नया निदेशक नियुक्त किया है।
राजेश, जो स्वयं आईएचआरडी के पूर्व छात्र हैं, अब अरुण कुमार की जगह लेंगे। अरुण कुमार पिछले तीन वर्षों से निदेशक-प्रभारी के रूप में कार्य कर रहे थे।
अरुण कुमार की नियुक्ति के बाद उनकी योग्यता और पात्रता को लेकर व्यापक आलोचना हुई थी। इस संबंध में कई याचिकाएं केरल हाईकोर्ट में भी दाखिल की गई थीं।
मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने पिछले वर्ष जून में उनकी पात्रता की जांच के आदेश दिए थे। अदालत ने यह भी जांच करने को कहा था कि क्या राजनीतिक प्रभाव के जरिए उन्हें निर्धारित नियमों को दरकिनार कर यह पद दिलाया गया।
हाईकोर्ट ने कहा था कि आईएचआरडी निदेशक का पद विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) के समान माना जाता है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया था कि 2018 के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) नियमों के अनुसार इस पद के लिए कम से कम सात वर्ष का शिक्षण अनुभव होना आवश्यक है।
अदालत ने इस बात पर संदेह जताया था कि क्या अरुण कुमार इन मानकों को पूरा करते हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि जांच में यह देखा जाए कि नियुक्ति में राजनीतिक प्रभाव की कोई भूमिका थी या नहीं। अदालत ने टिप्पणी की थी कि किसी ऐसे व्यक्ति को, जो पहले लिपिकीय (क्लेरिकल) पद पर कार्य कर चुका हो, विश्वविद्यालय के कुलपति के समकक्ष पद पर नियुक्त करना असामान्य प्रतीत होता है।
ये टिप्पणियां डॉ. विनु थॉमस की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई थीं। डॉ. थॉमस पहले त्रिक्काकरा स्थित मॉडल इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य रह चुके हैं और वर्तमान में केरल तकनीकी विश्वविद्यालय में डीन हैं।
यह पहला मौका नहीं था जब अरुण कुमार की नियुक्ति कानूनी जांच के दायरे में आई हो।
आईएचआरडी में सहायक निदेशक के रूप में उनकी नियुक्ति और बाद में पदोन्नति को भी पहले चुनौती दी गई थी। यह नियुक्तियां ईके नयनार के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार के कार्यकाल में हुई थीं।
हालांकि, उस मामले में सतर्कता (विजिलेंस) जांच में निष्कर्ष निकाला गया था कि उनकी नियुक्ति और पदोन्नति निर्धारित नियमों के अनुसार हुई थी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस अदालत ने मामला बंद करने की रिपोर्ट स्वीकार कर ली थी और अरुण कुमार को क्लीन चिट दे दी थी। बाद में तिरुवनंतपुरम की एक विशेष अदालत ने भी उन्हें संबंधित मामले में बरी कर दिया था।
सरकार के ताजा फैसले के साथ ही आईएचआरडी के नेतृत्व को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद समाप्त हो गया है।

