श्रीनगर, 11 सितंबर (आईएएनएस)। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के बागी नेता और लोकसभा सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने शुक्रवार को अपनी पार्टी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संशोधित वक्फ एक्ट और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के कुछ छंदों को थोपने के खिलाफ लड़ाई छोड़ दी है। साथ ही, रूहुल्लाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को अल्पसंख्यकों की चिंताओं के प्रति अधिक संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने अपनी ‘एक्स’ पोस्ट में कहा कि उन्होंने वक्फ संशोधन का विरोध किया था, लेकिन बाद में पाया कि उनकी पार्टी ने लड़ाई छोड़ दी और जम्मू-कश्मीर विधानसभा में इसके खिलाफ प्रस्ताव लाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाई। उन्होंने कहा कि पंजाब और कुछ दक्षिणी राज्यों ने ऐसा कदम उठाया था।
रूहुल्लाह ने वंदे मातरम के कुछ हिस्सों को अनिवार्य रूप से लागू करने का भी विरोध किया और इसे ‘असंवैधानिक’ बताया। रूहुल्लाह ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी ने इसके बजाय भाजपा और आरएसएस के सामने घुटने टेक दिए।
उन्होंने कहा, “ऐसे समय में जब अल्पसंख्यकों को हाशिए पर धकेला जा रहा है, हमें आरएसएस और भाजपा के सांप्रदायिक हमलों को सामान्य नहीं मानना चाहिए।” उन्होंने लोगों से पूरे भारत में अल्पसंख्यकों की चिंताओं के लिए खड़े होने का आग्रह किया।
रूहुल्लाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, जो भारत संघ में सबसे बड़ा मुस्लिम-बहुल क्षेत्र है, उसे अल्पसंख्यकों की धार्मिक मान्यताओं और चिंताओं के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर के पास सही बात के लिए खड़े होने का ऐतिहासिक मौका है। आइए इस मौके को न गंवाएं।” उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में समझदारी, संवेदनशीलता और साहस की जरूरत है, न कि किसी और समझौते की।
गौरतलब है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी हितों के खिलाफ काम करने के लिए रूहुल्लाह की कड़ी आलोचना कर चुकी है। पार्टी के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला भी रूहुल्लाह को लोकसभा से इस्तीफा देकर अपनी राजनीतिक ताकत के दम पर चुनाव जीतने की चुनौती दे चुके हैं। वहीं, रूहुल्लाह ने घोषणा की है कि वे 3 नवंबर को पार्टी और लोकसभा, दोनों से इस्तीफा देंगे।
