अमरावती, 11 सितंबर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश में हाल ही में शुरू किए गए एआई-बेस्ड पब्लिक ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम (पीजीआरएस) से शिकायतों को दर्ज करने, उनकी निगरानी करने और उनके समाधान की प्रक्रिया ज्यादा कुशल और नागरिकों के अनुकूल हो गई है।
यह बात आईटी और आरटीजीएस विभाग के सचिव भास्कर कटमनेनी ने कही।
रियल टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (आरटीजीएस) के सचिव ने एक समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि एआई-बेस्ड पीजीआरएस जिलों और मंडलों में शिकायतों की स्थिति का पूरा विश्लेषण करेगा, जिसमें उन इलाकों की पहचान करना भी शामिल है जहां बड़ी संख्या में शिकायतें अनसुलझी पड़ी हैं। इससे जिला कलेक्टरों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने और शिकायतों के समाधान में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
यह सिस्टम नागरिकों को एआई-बेस्ड पीजीआरएस चैटबॉट के जरिए सीधे अपने मोबाइल फोन से शिकायतें दर्ज करने और आसानी से अपने आवेदनों की स्थिति जानने की सुविधा भी देता है। अब तक चैटबॉट के जरिए 23,100 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि एआई-बेस्ड सिस्टम शिकायतों के समाधान के बाद नागरिकों से फीडबैक लेने की प्रक्रिया को भी ऑटोमेटेड (स्वचालित) बना देगा, जिससे प्रशासन को शिकायतों के समाधान की प्रभावशीलता और गुणवत्ता का आकलन करने में मदद मिलेगी।
चार जिले रोल मॉडल के तौर पर उभरे हैं। भास्कर कटमनेनी ने पीजीआरएस शिकायतों के समाधान में नेल्लोर, नंड्याल, कृष्णा और श्रीसत्य साई जिलों द्वारा अपनाए जा रहे नए और बेहतर तरीकों पर प्रकाश डाला।
इस बीच, सचिवालय में आयोजित 8वें जिला कलेक्टर सम्मेलन के दूसरे दिन, भास्कर कटमनेनी ने डेटा-आधारित गवर्नेंस पर एक पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन दिया।
उन्होंने कहा कि कलेक्टरों को यह सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए कि जिलों में हर अधिकारी आरटीजीएस के अवेयर ऐप और वेबसाइट का इस्तेमाल करे।
अधिकारी ने बताया कि राज्य में मौसम की स्थिति, बीमारियों की तीव्रता और अन्य गतिविधियों से जुड़ी सभी रियल-टाइम जानकारी अवेयर के जरिए उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि जिलों में इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अभी सीमित स्तर पर ही हो रहा है।
उन्होंने सुझाव दिया कि गांव स्तर के छोटे अधिकारियों से लेकर जिला कलेक्टरों तक, सभी को अवेयर का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कलेक्टरों को निगरानी करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पंचायत अधिकारी, वीआरओ और फील्ड स्तर के अन्य अधिकारी बिना किसी चूक के इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें।
कटमनेनी ने बताया कि किसी खास इलाके में हुई बारिश, अनुमानित या कम बारिश, इलाके के जलाशयों में पानी का स्तर, भूजल का स्तर और पानी की संभावित उपलब्धता जैसी जानकारी रियल-टाइम में उपलब्ध कराई जा रही है।
इस जानकारी का इस्तेमाल करके, फील्ड-लेवल के अधिकारी अपने-अपने इलाकों में मौसम की स्थिति, जल संसाधनों की उपलब्धता और बीमारियों के फैलने की तीव्रता के बारे में जान सकेंगे। उन्होंने कहा कि इससे अधिकारियों और कर्मचारियों को ज्यादा कुशलता से काम करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि अवेयर का इस्तेमाल करके अलग-अलग विभाग भी काफी फायदा उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि जीईएनसीओ बिजली की मांग का आकलन करने के लिए पहले से ही अवेयर से मिले हीट मैप का इस्तेमाल कर रहा है।
उन्होंने कहा कि म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट और फायर सर्विसेज डिपार्टमेंट भी अवेयर का अच्छा इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्होंने बाकी विभागों से भी अवेयर का असरदार तरीके से इस्तेमाल करने की अपील की।
