गुवाहाटी, 24 मई (आईएएनएस)। असम कांग्रेस विधायक नूरुल हुदा ने रविवार को रायजोर दल के प्रमुख और शिवसागर विधायक अखिल गोगोई पर आरोप लगाया कि वह कांग्रेस को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं और अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा की मदद कर रहे हैं।
पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस विधायक ने दावा किया कि गोगोई राजनीतिक जवाबदेही से बच निकले हैं और अब राज्य में विपक्ष की एकता को मजबूत करने के बजाय कांग्रेस को कमजोर करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
नुरुल हुदा ने कहा, “वह वास्तव में कांग्रेस के खिलाफ काम कर रहे हैं। भाजपा के हितों के साथ जुड़कर अखिल गोगोई कांग्रेस को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।”
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि अगर गोगोई को वास्तव में विपक्ष की एकता या गठबंधन से संबंधित मामलों को लेकर कोई चिंता थी या सुझाव थे, तो उन्हें मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक टिप्पणी करने के बजाय गठबंधन सहयोगियों की बैठकों के दौरान उन मुद्दों को उठाना चाहिए था।
विधायक ने कहा, “अगर वे खुद को विपक्षी गठबंधन का हितधारक मानते हैं, तो उन्हें इन मामलों पर गठबंधन की बैठकों या विधायक दल की चर्चाओं में बात करनी चाहिए थी। मीडिया को बयान देने से केवल भ्रम की स्थिति पैदा होती है।”
कांग्रेस विधायक नूरुल हुदा ने कहा कि असम की जनता और कांग्रेस के भीतर के नेताओं दोनों को अब गोगोई के हालिया बयानों और कार्यों के पीछे की राजनीतिक मंशा समझ आ गई है।
नूरुल हुदा के अनुसार, रायजोर दल प्रमुख द्वारा बार-बार की गई सार्वजनिक टिप्पणियों ने हाल ही में हुए असम विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष के साथ समन्वय के प्रति उनके राजनीतिक रुख और प्रतिबद्धता पर संदेह पैदा कर दिया है।
विधायक ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि कांग्रेस नेता गोगोई से संवाद करने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक राजनीति में गठबंधन सहयोगियों के बीच संवाद और समन्वय आवश्यक है।
हुदा ने कहा, “किसी से बचने का तो सवाल ही नहीं उठता लेकिन राजनीतिक प्रसिद्धि पाने के लिए सार्वजनिक रूप से गैरजिम्मेदाराना बयान देना विपक्ष के लिए ठीक नहीं है।”
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि विपक्षी दलों के बीच किसी भी आंतरिक मतभेद को सार्वजनिक हमलों के बजाय चर्चा और परामर्श के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद असम में विपक्षी दलों के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच ये टिप्पणियां सामने आई हैं।
भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 126 सदस्यीय असम विधानसभा में 102 सीटें हासिल कीं और विपक्ष को करारी हार का सामना करना पड़ा।

