Sunday, August 23, 2026
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मुसलमानों के पास विकल्प नहीं, इसलिए मजबूरी में देते हैं कांग्रेस को वोट: पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब

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नई दिल्ली, 15 मई (आईएएनएस)। पूर्व राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ नेता मोहम्मद अदीब ने कहा कि आज के बढ़ते ध्रुवीकरण वाले राजनीतिक माहौल में सभी राजनीतिक दल बहुसंख्यक समुदाय के वोट खोने से डरते हैं, जबकि अल्पसंख्यकों के वोट को हल्के में लिया जा रहा है।

आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में पूर्व सांसद ने कहा कि हर राजनीतिक पार्टी सिर्फ इस बात पर ध्यान दे रही है कि हिंदू वोट बैंक उनसे दूर न हो जाए।

इस सवाल पर कि क्या मुस्लिम समुदाय कांग्रेस पर भरोसा कर सकता है, उन्होंने कहा कि मुसलमानों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है, इसलिए वे मजबूरी में कांग्रेस को वोट देते हैं।

पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब ने मौजूदा राजनीतिक माहौल पर चिंता जताते हुए कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर मुसलमान खुद को लगातार हाशिए पर महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ राजनीतिक दलों का सिर्फ वोट बैंक बनाकर रख दिया गया है।

उन्होंने कहा कि पांच राज्यों के चुनाव और चुनाव प्रचार नफरत और पहचान की राजनीति के माहौल में हुए। तमिलनाडु चुनाव में सनातन धर्म को ‘खत्म करने’ जैसे बयानों के बीच टीवीके की शानदार शुरुआत पर उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि चुनावी राजनीति धर्म और आस्था के इर्द-गिर्द घूम रही है।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय ने अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं के साथ खुद को जोड़ने की कोशिश की, लेकिन आखिर में उन्हें खुद को ठगा हुआ और नजरअंदाज किया हुआ महसूस हुआ।

मोहम्मद अदीब ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं का उभार सिर्फ अल्पसंख्यकों के अधिकारों की लड़ाई की वजह से नहीं है, बल्कि इसकी वजह समुदाय का राजनीतिक दलों और नेतृत्व से मोहभंग होना भी है।

पूर्व सांसद ने भारतीय मुसलमानों की स्थिति की तुलना गाजा या म्यांमार के मुसलमानों से सीधे तौर पर नहीं की, लेकिन हालत पर उन्होंने चिंता जरूर जताई।

उन्होंने कहा कि क्या हम म्यांमार के मुसलमानों या गाजा के फिलिस्तीनियों जैसी स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं? शायद अभी नहीं, लेकिन अगर अदालतें इसी तरह चुप रहीं और पुलिस व्यवस्था में नफरत बनी रही तो स्थिति और खराब हो सकती है।”

इस सवाल पर कि क्या मुस्लिम समुदाय को चुनावों का बहिष्कार करना चाहिए, पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब ने कहा कि यह कोई सही विकल्प नहीं है। हालांकि उन्होंने चुनावों के दौरान सांप्रदायिक माहौल और भड़काऊ बयानबाजी कम करने की अपील की।

इंडिया गठबंधन के एनडीए को चुनौती देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह तभी संभव है, जब कांग्रेस और उसके सहयोगी दल आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होकर लड़ाई लड़ें।