कोलकाता, 27 मई (आईएएनएस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बढ़ते अंदरूनी संकट और पार्टी नेताओं द्वारा महासचिव एवं लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी पर लगातार निशाना साधे जाने के बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘गिरगिट’ विषय पर कविता लिखकर बागियों को परोक्ष संदेश दिया है।
ममता बनर्जी ने बुधवार रात अपने फेसबुक पेज पर बंगाली भाषा में लिखी कविता ‘गिरगिट’ साझा की। इसे पार्टी के भीतर असंतोष फैलाने और संकट के समय टीएमसी छोड़ने की कोशिश करने वालों पर अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है।
कविता की शुरुआती पंक्तियों में उन्होंने लिखा, “गिरगिटों से भी ज्यादा खतरनाक वे बहुरूपी लोग हैं, जो अपने स्वार्थ और कमाई के स्रोत बचाने के लिए और तेजी से रंग बदलते हैं।”
कविता में आगे कहा गया है कि ऐसे लोग अपने आर्थिक हितों के लिए कुछ ही घंटों में रंग और चरित्र बदल लेते हैं तथा कार्यकर्ताओं और आम लोगों के आत्मसम्मान को बेच देते हैं।
ममता बनर्जी ने कविता के जरिए पार्टी के बागी नेताओं को चेतावनी भी दी। उन्होंने लिखा, “जैसे रथ के पहिए चलते हैं, वैसे ही तुम्हारे पहिए भी चलेंगे। तुम्हें इसका परिणाम मिलेगा। उस दिन गद्दार समझेंगे कि अमानवीयता और मूल्यहीनता क्या होती है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष का पहले से अंदेशा था। चुनाव नतीजों के बाद नव-निर्वाचित विधायकों के साथ पहली बैठक में उन्होंने कहा था कि जो लोग टीएमसी छोड़ना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं।
इसके बाद से पार्टी में अंदरूनी विरोध और तेज हो गया। ऐसे में ममता बनर्जी की यह कविता सीधे तौर पर बागी नेताओं के लिए संदेश मानी जा रही है, जिसने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है।

