नई दिल्ली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने 2026 (वित्त वर्ष 2026-27) के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.0 प्रतिशत कर दिया है। यह उसके पहले के 6.6 प्रतिशत के अनुमान से 40 आधार अंक अधिक है।
एडीबी ने एक बयान में कहा कि दक्षिण एशिया के लिए इस साल की आर्थिक वृद्धि का अनुमान जुलाई के 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया गया है। इसमें भारत के आर्थिक विकास में मजबूत सरकारी निवेश और निर्यात में ठोस वृद्धि की अहम भूमिका है।
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार विकासशील एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि 2025 के 5.5 प्रतिशत से घटकर इस साल 5 प्रतिशत रह सकती है। इसके बाद 2027 (वित्त वर्ष 2027-28) में यह मामूली बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो सकती है।
2026 का यह अनुमान जुलाई में जारी पिछले अनुमान से 0.1 प्रतिशत अंक अधिक है।
एडीबी के अध्यक्ष मासातो कांडा ने कहा, “क्षेत्र लचीला बना हुआ है, लेकिन जोखिम बढ़ रहे हैं।”
मजबूत हो रहा ला नीना के विपरीत अल नीनो और शुष्क परिस्थितियों के कारण फसल उत्पादन कम हो सकता है और जलविद्युत उत्पादन घट सकता है। इससे खाद्य और ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं और सबसे कमजोर वर्गों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ सकता है।
कांडा ने कहा कि लंबे समय से जारी ऊर्जा संकट और वित्तीय बाजारों में फिर से बढ़ते जोखिमों के बीच सरकारों के लिए सबसे अधिक प्रभावित लोगों की सुरक्षा और तैयारी करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि एडीबी ऐसे प्रयासों का मजबूती से समर्थन कर रहा है।
एडीबी ने कहा कि मजबूत निवेश, सरकार का प्रोत्साहन और वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) निवेश चक्र से बढ़े मजबूत टेक्नोलॉजी निर्यात आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे रहे हैं। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत होता अल नीनो ऊर्जा तथा खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
एशियन डेवलपमेंट आउटलुक (एडीओ) सितंबर 2026 में एडीबी ने 2026 के लिए क्षेत्रीय महंगाई का अनुमान जुलाई के 4.3 प्रतिशत से घटाकर 4.2 प्रतिशत कर दिया है। कीमतों को स्थिर करने के उपायों ने लगातार ऊंची ऊर्जा कीमतों के प्रभाव को आंशिक रूप से कम किया है।
एडीओ सितंबर 2026 के अनुसार, क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि और महंगाई के परिदृश्य के सामने दो प्रमुख जोखिम हैं।
पहला जोखिम बढ़ता संघर्ष है, विशेष रूप से मध्य पूर्व में संघर्ष के विस्तार और रूस-यूक्रेन युद्ध के तेज होने का। इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतें ऊंची और अस्थिर बनी रह सकती हैं तथा इसका असर अन्य जिंसों पर भी पड़ सकता है।
दूसरा जोखिम बहुत मजबूत अल नीनो है, जिसके 2027 की पहली तिमाही तक बने रहने का अनुमान है। इससे ऊर्जा की मांग बढ़ सकती है और कृषि उत्पादन घट सकता है, जिससे ईंधन और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
एडीबी ने कहा कि एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों के मूल्यांकन में तेज गिरावट, वित्तीय परिस्थितियों का सख्त होना और व्यापार नीति को लेकर फिर से बढ़ती अनिश्चितता भी आर्थिक वृद्धि के लिए नकारात्मक जोखिम पैदा कर सकती है।
