गुवाहाटी, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार को 13 से 31 अक्टूबर तक राज्य भर के जिला मुख्यालयों पर शांतिपूर्ण रैलियों की घोषणा की। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) की आलोचना के माध्यम से संवैधानिक संस्थानों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा कि भाजपा की असम यूनिट रैलियां आयोजित करेगी। ये रैलियां कांग्रेस की उन कोशिशों का जवाब देने के लिए होंगी, जिनके जरिए वह संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने और लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
यह घोषणा तब हुई जब राहुल गांधी नई दिल्ली में चुनाव आयोग के कामकाज के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। सीएम सरमा ने कांग्रेस पर चुनावी नतीजों को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी चुनाव जीतने पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को स्वीकार करती है, लेकिन हारने के बाद उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है।
एक्स पर पोस्ट में उन्होंने लिखा कि राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी भारत के लोकतंत्र की नींव पर हमला कर रहे हैं। उनका दोहरा मापदंड साफ दिखता है। जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री चुने जाते हैं, तो राहुल गांधी इसे हेरफेर कहते हैं, फिर भी संसद के लिए उनका अपना चुनाव और उसके बाद विपक्ष के नेता के तौर पर उनका पद्भार संभालना सवालों से परे है।
उन्होंने कहा कि जब असम में वोटिंग होती है, तो नतीजा स्वीकार्य नहीं होता लेकिन जब केरल में नतीजे आते हैं, तो उसका स्वागत किया जाता है। कांग्रेस के लिए लोकतंत्र तभी सही है जब कांग्रेस की जीत हो।
उन्होंने राहुल गांधी के उस फैसले की भी आलोचना की जिसमें उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा विपक्षी सांसदों के साथ बैठक के अनुरोध को ठुकराए जाने के बाद भी इस मामले को आगे बढ़ाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी न्यायपालिका पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही थी।
उन्होंने कहा कि रैलियों में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (एसआईआर) के प्रति कांग्रेस के विरोध को उजागर किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इस विरोध का मकसद अवैध घुसपैठियों को बचाना है।
सीएम सरमा ने कहा कि इन रैलियों के जरिए वे लोगों को कांग्रेस पार्टी की इन कोशिशों के बारे में सचेत करेंगे। हमारी संवैधानिक संस्थाओं को ब्लैकमेल करना, विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) का विरोध करके अवैध घुसपैठियों को बचाना और लोगों के लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करना।
उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री मोदी के विजन के लिए भाजपा के समर्थन को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए। हमारे संस्थानों को आजादी मिलनी चाहिए। दोनों में से किसी को भी राजनीतिक सुविधा के लिए बंधक नहीं बनाया जा सकता।
यह टकराव मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के राहुल गांधी के आरोपों के बाद हुआ है, जिससे चुनावी पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही को लेकर राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।
