गुवाहाटी, 25 जून (आईएएनएस)। असम के वित्त मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने गुरुवार को कहा कि राज्य सरकार के आगामी बजट में राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए और सभी क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी लाते हुए आवंटित निधियों के पूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
भाजपा प्री-बजट परामर्श कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मल्ला बरुआ ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के बजटीय आवंटन का लगभग 90 प्रतिशत पहले ही उपयोग किया जा चुका है, जो सरकार की बेहतर कार्यान्वयन क्षमता को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि अब लक्ष्य स्वीकृत धनराशि का लगभग 100 प्रतिशत व्यय हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ना है, ताकि सार्वजनिक व्यय के प्रभाव को अधिकतम किया जा सके।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार विभिन्न हितधारकों से परामर्श करने और समाज के विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों को ध्यान में रखते हुए बजट तैयार कर रही है।
उन्होंने कहा कि असम की विकास गति को बनाए रखने के लिए वित्तीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग एक प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है।
मल्ल बरुआ ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य के राजकोषीय प्रबंधन में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है, जिससे सरकार वित्तीय स्थिरता से समझौता किए बिना प्रमुख बुनियादी ढांचा, कल्याण और आर्थिक विकास की पहल करने में सक्षम हुई है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आगामी बजट में असम के दीर्घकालिक विकास पथ को मजबूत करते हुए बुनियादी ढांचे, रोजगार सृजन, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण में निवेश को प्राथमिकता देना जारी रखा जाएगा।
वित्त मंत्री ने सार्वजनिक व्यय में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सरकार के फोकस का जिक्र किया और कहा कि विभागों को परियोजनाओं के समय पर निष्पादन और बजटीय आवंटन के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
असम विधानसभा का बजट सत्र 6 जुलाई से शुरू होने वाला है। इस दौरान चालू वित्तीय वर्ष का राज्य बजट प्रस्तुत किया जाएगा।
सरकार से यह उम्मीद की जा रही है कि वह राज्य भर में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार करने और प्रमुख योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने के उद्देश्य से उपायों की घोषणा करेगी।
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के बाद यह पहला बजट है। भाजपा ने राज्य में पहली बार अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए 82 सीटें जीतीं। भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने राज्य की 126 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें जीतीं। कांग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा, विपक्षी दल को केवल 19 सीटें मिलीं, जो इतिहास में उसका सबसे कम आंकड़ा है।

