Monday, August 17, 2026
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बंगाल के मुख्यमंत्री ने प्रवासी श्रमिकों को राज्य वापसी का दिया भरोसा, स्टील प्लांट शिलान्यास समारोह में की कई घोषणाएं

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कोलकाता, 17 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को रोजगार के अवसर पैदा करने और बड़े औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देकर राज्य के प्रवासी श्रमिकों की धीरे-धीरे वापसी सुनिश्चित करने का भरोसा दिया।

मुख्यमंत्री ने आदिवासी बहुल पुरुलिया जिले के रघुनाथपुर में 4,000 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले ग्रीनफील्ड एकीकृत स्टील प्लांट के शिलान्यास समारोह में हिस्सा लिया।

उन्होंने कहा, “मैं पश्चिम बंगाल के प्रवासी श्रमिकों को भरोसा देता हूं कि उन्हें राज्य में वापस आने का अवसर मिलेगा। रोजगार की कोई कमी नहीं होगी। हमारे पास बड़े औद्योगीकरण की योजनाएं हैं। रघुनाथपुर का यह स्टील प्लांट करीब 10,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार देगा। इलाके के स्थानीय आदिवासी युवाओं को भी नौकरी मिलेगी। इससे पूरे क्षेत्र का विकास होगा।”

यह राज्य का दूसरा स्टील प्लांट है। मुख्यमंत्री ने पिछले महीने इसके शिलान्यास की प्रक्रिया शुरू की थी। हाल ही में बांकुरा जिले के मेजिया में 15,000 करोड़ रुपए की लागत वाले एकीकृत स्टील प्लांट का उद्घाटन भी किया गया था।

उन्होंने सोमवार को पुरुलिया के मानबाजार में जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) की सहायता से तैयार पेयजल पाइपलाइन परियोजना का भी उद्घाटन किया। उन्होंने घोषणा की कि इस्कॉन जल्द ही पुरुलिया जिले के सभी सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था शुरू करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, “इस्कॉन द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन के अलावा सरकारी स्कूलों के छात्रों को सप्ताह में दो बार अंडे भी दिए जाएंगे, जैसा कोलकाता में किया जा रहा है। कोलकाता की तरह मिड डे मील बनाने से जुड़ी महिलाओं की नौकरियां भी सुरक्षित रहेंगी।”

उन्होंने यह भी घोषणा की कि इस वर्ष से आदिवासी बहुल बांकुरा और पुरुलिया जिलों में मां मनसा के पर्व पर सरकारी अवकाश रहेगा।

आदिवासी समुदायों में सर्पों की देवी मां मनसा की व्यापक पूजा को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रशासन विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन और दिव्यांगजनों के लिए भत्तों जैसी योजनाओं के आवेदन में मदद के लिए जनकल्याण शिविर आयोजित करेगा। पिछली राज्य सरकार के समय लगाए गए कई जनकल्याण शिविर लोगों की पहुंच से दूर होते थे। अब ऐसे शिविर आसानी से पहुंच वाले स्थानों पर आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग लाभ उठा सकें।