नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), हैदराबाद के साथ भारतीय सेना के लिए पांच ग्राउंड-बेस्ड मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की खरीद के लिए 1,476 करोड़ रुपए के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, जिसमें कम से कम 72 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री शामिल है।
यह अनुबंध ‘खरीद (भारतीय स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण)’ श्रेणी के तहत किया गया, जिस पर राष्ट्रीय राजधानी में कर्तव्य भवन में रक्षा सचिव कुमार सिंह की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।
बीईएल भारतीय सेना के लिए अत्याधुनिक स्वदेशी ग्राउंड-बेस्ड मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का निर्माण करती है, जो इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (ईडब्ल्यू), निगरानी और सुरक्षित टैक्टिकल कम्युनिकेशन पर केंद्रित होते हैं।
रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह सिस्टम भारतीय सेना की यूनिट्स को आधुनिक बनाएगा और देश के स्वदेशी रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम को भी मजबूत करेगा। यह अनुबंध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।
ग्राउंड-बेस्ड मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम एक वाहन पर लगा इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म होता है, जिसे दुश्मन के रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स का रियल-टाइम में पता लगाने, उनका विश्लेषण करने और निगरानी के लिए डिजाइन किया जाता है। आमतौर पर इनमें हाई-सेंसिटिविटी रिसीवर्स, 360-डिग्री कवरेज और 3डी मैपिंग जैसी सुविधाएं होती हैं, जिससे युद्धक्षेत्र की स्थिति का तेजी से आकलन किया जा सकता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि सरकार ने रक्षा अनुसंधान को अपनी प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा है और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अब तक 2,200 तकनीकों को विभिन्न उद्योगों को हस्तांतरित कर चुका है।
भारतीय सेना द्वारा आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में भविष्य के लिए तैयार रहने के लिए अनुसंधान पर लगातार ध्यान देना और सरप्राइज एलिमेंट बनाए रखना बेहद जरूरी है।
उन्होंने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा उद्योग, अकादमिक संस्थानों और स्टार्टअप्स के लिए निर्धारित किया गया है और अब तक इन संस्थाओं ने 4,500 करोड़ रुपए से अधिक का उपयोग किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार के आत्मनिर्भरता के प्रयास सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं, जहां वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपए के अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

