Tuesday, May 26, 2026
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असम पहुंचे भूटान के पीएम की सीएम हिंमता बिस्वा सरमा के साथ क्षेत्रीय सहयोग और कनेक्टिविटी पर चर्चा

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गुवाहाटी, 25 मई (आईएएनएस)। भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोबगे सोमवार को असम पहुंचे, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ चर्चा की। इस दौरान दोनों पक्षों ने भारत और भूटान के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने में असम की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया।

सीएम सरमा ने गुवाहाटी में भूटान के प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए इस दौरे को भूटान और पूर्वोत्तर क्षेत्र के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

असम के मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर पोस्ट किया, “गुवाहाटी में भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोबगे का स्वागत करके और उनसे मिलकर मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं।”

सरमा ने कहा कि भारत और भूटान के बीच ‘बहुत ही विशेष ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध’ हैं और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में असम इस साझेदारी को आगे बढ़ाने में एक अहम भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि असम और भूटान के बीच घनिष्ठ सहयोग 21वीं सदी में दक्षिण एशियाई क्षेत्र के आर्थिक और रणनीतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

अधिकारियों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा का मुख्य केंद्र सीमा पार कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संबंधों को बढ़ाना था। बातचीत के दौरान जलविद्युत, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर भी प्रमुखता से चर्चा हुई।

भूटान का असम के साथ भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से गहरा जुड़ाव है, खासकर उन जिलों के माध्यम से जो इस हिमालयी साम्राज्य की सीमा से सटे हुए हैं। हाल के वर्षों में दोनों पक्षों ने कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग को बेहतर बनाने के प्रयासों को तेज किया है।

अधिकारियों ने बताया कि भूटान के प्रधानमंत्री के इस दौरे से उप-क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूती मिलने और पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश तथा सतत विकास के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

भारत और भूटान के बीच पारंपरिक रूप से घनिष्ठ राजनयिक संबंध रहे हैं, जिसमें नई दिल्ली भूटान का एक प्रमुख विकास भागीदार रहा है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच संबंध रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में लगातार विस्तृत हुए हैं।

असम सरकार भी भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत राज्य को क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है।