Saturday, June 27, 2026
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अमेरिका ने सराहा भारत का ऊर्जा संतुलन, नेताओं ने बताया बड़ी कूटनीतिक जीत

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नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की ओर से भारत की ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति के समर्थन का वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और नेताओं ने स्‍वागत क‍िया और इसे एक ‘बड़ी कूटनीतिक जीत’ बताया।

आईएएनएस को दिए एक खास इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक वैश्विक ताकत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लिए जा रहे फैसलों में उसकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

रुबियो के इस बयान पर ऑस्ट्रेलिया इंडिया स्ट्रैटेजिक अलायंस के चेयरमैन जगविंदर सिंह विर्क ने कहा, “यह एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। यह दिखाता है कि भारत क्या कर सकता है। पूरी दुनिया में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 50 प्रतिशत तक बढ़े हैं। लेकिन भारत में तमाम मुश्किलों के बावजूद डीजल के दाम ज्यादा नहीं बढ़े और पेट्रोल में भी सिर्फ पांच, सात या दस रुपये तक की बढ़ोतरी हुई, जो दस प्रतिशत से भी कम है।”

उन्होंने आईएएनएस से कहा, “युद्ध जैसी परिस्थितियों के असर को संभालना भारत सरकार की बड़ी उपलब्धि रही है। यह कूटनीतिक सफलता दिखाती है कि भारत ने किस तरह के रिश्ते बनाए हैं। अब अमेरिका और दूसरे देश भी इसे स्वीकार कर रहे हैं।”

विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि जब से प्रधानमंत्री मोदी ने जिम्मेदारी संभाली है, उनका एकमात्र लक्ष्य देश को मजबूत बनाना रहा है।

उन्होंने कहा, “देश को सामाजिक स्तर पर मजबूत करना, आंतरिक सुरक्षा को बेहतर करना और बाहरी खतरों से निपटने के लिए देश को तैयार करना। प्रधानमंत्री मोदी ने इन सभी क्षेत्रों में पूरी कोशिश की है। इसी तरह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के नारे के साथ सत्ता में आए थे।”

इसी तरह की बात रखते हुए जॉर्डन, लीबिया और माल्टा में भारत के पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुनायत ने भारत को दुनिया का ‘सबसे बड़ा और मजबूत लोकतंत्र और सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था’ बताया।

उन्होंने आईएएनएस कहा, “तकनीक के क्षेत्र में भी भारत ने काफी प्रगति की है, खासकर रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में। हमारी ऊर्जा सुरक्षा भी बहुत जरूरी है। ईरान संघर्ष और उससे पैदा हुए तनाव के कारण भारत ने अपनी ऊर्जा नीतियों में बदलाव करते हुए अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा हासिल करने पर ध्यान दिया है।”

त्रिगुनायत ने कहा कि भारत के सामने घरेलू स्तर पर कुछ चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन आज उसकी विदेश नीति मजबूत और हालात के हिसाब से खुद को ढालने वाली है।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एसपी वैद ने कहा, “भारत शायद एशिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां पश्चिम एशिया संकट के बावजूद कीमतों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई। जो भी महंगाई आई, उसका बोझ भारतीय सरकार ने संभाला। आम लोगों को इस संकट का ज्यादा भार नहीं उठाना पड़ा, जिसका श्रेय सरकार को जाता है।”