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ओडिशा विधानसभा में दूसरे दिन भी हंगामा, पाठ्यपुस्तकों में गलती और एमएमडीआर कानून पर विपक्ष का विरोध

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भुवनेश्वर, 23 सितंबर (आईएएनएस)। ओडिशा विधानसभा में मानसून सत्र के दूसरे दिन बुधवार को भी विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस के सदस्यों ने स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में गलतियों और एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 को लेकर जमकर हंगामा किया।

जैसे ही प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू हुई, कांग्रेस और बीजद के विधायक बैनर और तख्तियां लेकर स्पीकर के पोडियम के पास जमा हो गए और सरकार विरोधी नारे लगाने लगे।

सत्र के दूसरे दिन विपक्षी कांग्रेस ने एमएमडीआर संशोधन अधिनियम को रद्द करने की अपनी मांग दोहराई, जबकि बीजद सदस्यों ने राज्य में स्कूली पाठ्यपुस्तकों में मिली गलतियों को लेकर स्कूल और जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग फिर से उठाई।

भारी शोर-शराबे के बीच भी उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई ने कार्यवाही चलाने की कोशिश की, लेकिन बीजद और कांग्रेस विधायकों ने विरोध जारी रखा, जिसके कारण उन्हें सदन को शाम 4 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

बीजद विधायक शारदा प्रसन्न जेना ने कहा, “सरकार में कोई भी इस चूक की नैतिक जिम्मेदारी नहीं ले रहा है। अर्धवार्षिक परीक्षाएं अगले 15 दिनों में शुरू होने वाली हैं, लेकिन छात्रों को अभी तक सुधारी गई पाठ्यपुस्तकें नहीं दी गई हैं। इसलिए स्कूल और जन शिक्षा मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि भाजपा हमेशा खुद को विचारधारा पर आधारित पार्टी बताती रही है।”

कांग्रेस पार्टी ने भी एमएमडीआर संशोधन अधिनियम को निरस्त करने और सदन में इस कानून पर विस्तृत चर्चा की अपनी मांग जारी रखी।

कांग्रेस विधायक दल के नेता रमा चंद्र कदम ने कहा, “जब तक एमएमडीआर संशोधन अधिनियम निरस्त नहीं हो जाता, हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। चाहे विधानसभा हो, संसद हो या सड़क, कांग्रेस इस मुद्दे को उठाती रहेगी।”

वहीं, सत्तारूढ़ भाजपा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल अपने राजनीतिक हितों के लिए जानबूझकर सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं। पार्टी ने कहा कि राज्य सरकार राज्य के हितों से जुड़े सभी मुद्दों पर बहस के लिए तैयार है, लेकिन विपक्षी दल बहस से बच रहे हैं।

भाजपा विधायक मानस कुमार दत्ता ने आरोप लगाया कि बीजद ने पहले विधानसभा के नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार सदन में बहस की मांग करते हुए एक प्रस्ताव दिया था, जिसे स्पीकर ने स्वीकार भी कर लिया था।

उन्होंने कहा कि सरकार भी बहस के लिए तैयार थी, लेकिन बीजद के सदस्य इसमें भाग लेने के बजाय जानबूझकर सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहे थे, ताकि भुवनेश्वर में क्षेत्रीय पार्टी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन की ओर ध्यान खींचा जा सके, जिसमें पाठ्यपुस्तक में गलती के मुद्दे पर मंत्री गोंड के इस्तीफे की मांग की जा रही थी।