Tuesday, July 14, 2026
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तमिलनाडु के गुम्मीडीपुंडी स्टील प्लांट में बॉयलर विस्फोट; प्रवासी मजदूर की मौत, चार गंभीर रूप से झुलसे

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चेन्नई, 14 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के गुम्मीडीपुंडी स्थित एसआईपीसीओटी औद्योगिक क्षेत्र के एक स्टील मेल्टिंग यूनिट में मंगलवार को बॉयलर फटने से एक प्रवासी मजदूर की मौत हो गई, जबकि चार अन्य मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद फैक्ट्री में भीषण आग लग गई, जिसके चलते बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया गया।

मृतक की पहचान रवि के रूप में हुई है, जो उत्तर भारत के एक राज्य का रहने वाला प्रवासी मजदूर था। बॉयलर में विस्फोट होने के समय वह ड्यूटी पर मौजूद था और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

विस्फोट में घायल हुए चार अन्य मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। उन्हें बचाकर तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, स्टील मेल्टिंग यूनिट के अंदर कर्मचारी नियमित कार्य कर रहे थे, तभी अचानक बॉयलर में विस्फोट हो गया।

विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि उसके बाद फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। आग की ऊंची लपटें और धुएं का घना गुबार पूरे औद्योगिक परिसर में फैल गया, जिससे आसपास काम कर रहे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई।

मंगलवार को हुए इस बॉयलर विस्फोट ने जिले के औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कार्यस्थल सुरक्षा मानकों को लेकर चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच जारी है और विस्फोट से हुए नुकसान का पूरा आकलन किया जा रहा है।

घटना की सूचना मिलते ही अग्निशमन एवं बचाव सेवा की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने बताया कि बॉयलर विस्फोट के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। यह पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है कि हादसा तकनीकी खराबी, उपकरणों की विफलता या औद्योगिक सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के कारण हुआ। अधिकारी यह भी जांच करेंगे कि संबंधित बॉयलर का अनिवार्य रखरखाव और सुरक्षा निरीक्षण समय पर किया गया था या नहीं।

वहीं, पिछले दिनों पेरियापालयम के पास स्थित एक झींगा (श्रिम्प) प्रसंस्करण फैक्ट्री में अमोनिया गैस रिसाव से 18 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी। उस घटना में कई अन्य लोग भी प्रभावित हुए थे और खतरनाक गैस को हटाने के लिए प्रशासन ने चार दिनों तक व्यापक अभियान चलाने के बाद फैक्ट्री को सील कर दिया था।