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गुजरात बम धमकी मामला: जांच में बांग्लादेश और पाकिस्तान तक पहुंचे ईमेल के तार

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अहमदाबाद, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने बुधवार को बताया कि अक्टूबर में स्कूलों, अदालतों, सरकारी कार्यालयों और नरेंद्र मोदी स्टेडियम को भेजे गए बम की धमकी वाले दो अलग-अलग ईमेल के तार बांग्लादेश और पाकिस्तान से जुड़े पाए गए हैं। जांच में सामने आया है कि इन धमकी भरे संदेशों को पुराने ईमेल अकाउंट्स के माध्यम से भेजा गया था।

7 अक्टूबर और 27 अक्टूबर को मिले इन ईमेल में कुल 35 स्थानों को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी। इनमें 24 स्कूल, मेयर कार्यालय, अदालतें और मोटेरा स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम शामिल थे।

पुलिस ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर ली है और केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर जांच कर रही है।

साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार, 7 अक्टूबर को भेजे गए ईमेल में 16 स्थानों पर बम विस्फोट की धमकी दी गई थी। इनमें 10 स्कूल, मेयर कार्यालय, गुजरात हाईकोर्ट, सोला कोर्ट, घीकांटा मेट्रो कोर्ट, अहमदाबाद जिला एवं सत्र न्यायालय और नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम शामिल थे।

संदेश में खालिस्तानी संगठनों का जिक्र करते हुए लोगों से पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रमों में शामिल न होने की अपील की गई थी। साथ ही 21 नवंबर को नरेंद्र मोदी स्टेडियम और 1 नवंबर को दिल्ली के जेएलएन स्टेडियम में विस्फोट की धमकी दी गई थी।

ईमेल में 1984 के सिख विरोधी दंगों का भी उल्लेख था और खालिस्तान नेशनल आर्मी तथा बब्बर खालसा जैसे संगठनों के नाम लिए गए थे।

27 अक्टूबर को एक आईडी से दूसरा ईमेल भेजा गया, जिसमें अहमदाबाद के स्कूलों में बम ब्लास्ट की धमकी दी गई थी। इस ईमेल में 19 स्थानों को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी। इनमें 14 स्कूल, मेयर कार्यालय, दाणापीठ के दो कार्यालय, घीकांटा मेट्रो कोर्ट, अहमदाबाद सिटी सिविल कोर्ट और नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम शामिल थे।

इस संदेश में भी खालिस्तानी संगठनों का जिक्र किया गया और 21 नवंबर को दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रम से जुड़े बम हमलों की धमकी दी गई। ईमेल में आईफोन के जरिए विस्फोट करने की धमकी दी गई थी। साथ ही 1984 के सिख विरोधी दंगों का संदर्भ देते हुए लोगों को 21 नवंबर को मोटेरा स्टेडियम मेट्रो स्टेशन से यात्रा न करने की चेतावनी भी दी गई थी।

साइबर क्राइम ब्रांच ने बताया कि दोनों ईमेल मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66(सी) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

पुलिस ने प्रभावित स्कूलों और अदालत परिसरों का दौरा किया तथा ईमेल हेडर और जीमेल से प्राप्त तकनीकी जानकारी का विश्लेषण किया।

प्रारंभिक जांच में पता चला कि धमकी भेजने के लिए इस्तेमाल किए गए ईमेल खाते बांग्लादेश और पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे थे।

पुलिस के अनुसार, 7 अक्टूबर का ईमेल बांग्लादेश और पाकिस्तान के रावलपिंडी से जुड़े खातों से संचालित होता दिखाई दिया, जबकि 27 अक्टूबर का ईमेल बांग्लादेश के रंगपुर और पाकिस्तान के लाहौर से संचालित होने के संकेत मिले।

जांच के दौरान पुलिस ने खालिस्तानी संगठनों के नाम पर भेजी गई इसी तरह की पुरानी धमकियों के एक मामले का भी अध्ययन किया। उस मामले में पश्चिम बंगाल से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था। जांच में पता चला था कि उसने हैक किए गए जीमेल अकाउंट बांग्लादेश में रहने वाले एक व्यक्ति को बेचे थे।

आगे की पूछताछ में उस व्यक्ति ने बताया कि उसने वे अकाउंट पाकिस्तान में मौजूद एक व्यक्ति को बेचे थे और भुगतान क्रिप्टोकरेंसी के जरिए प्राप्त किया था।

जांचकर्ताओं का दावा है कि पाकिस्तान में बैठे कुछ लोग त्योहारों और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों से पहले लोगों में डर और दहशत फैलाने के मकसद से ऐसे बम धमकी वाले ईमेल भेज रहे थे।

पुलिस के मुताबिक, ये लोग टेलीग्राम और व्हाट्सऐप समूहों के माध्यम से बांग्लादेश और अन्य देशों से पुराने या हैक किए गए ईमेल खाते हासिल कर रहे थे।

साइबर क्राइम ब्रांच ने कहा कि दोनों मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से जारी है।