कोलकाता, 25 सितंबर (आईएएनएस)। कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को एकल पीठ द्वारा दी गई अंतरिम राहत वापस ले ली। यह राहत उन्हें किसी नए मामले में गिरफ्तारी या अन्य पुलिस कार्रवाई से अस्थायी संरक्षण के रूप में दी गई थी।
मिलन प्रधान फिलहाल दो मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं। वर्ष 2007 के हत्या के एक मामले में उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, जबकि दूसरे मामले में अदालत ने उन्हें 5 अक्टूबर तक जेल भेजने का आदेश दिया है।
गुरुवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने आदेश दिया था कि जिन दो मामलों में मिलन प्रधान पहले से न्यायिक हिरासत में हैं, उन्हें छोड़कर 12 अक्टूबर तक पश्चिम बंगाल पुलिस उनके खिलाफ कोई नया मामला दर्ज नहीं करेगी और न ही किसी नए मामले में उन्हें गिरफ्तार दिखाएगी।
एकल पीठ के इस आदेश के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे और न्यायमूर्ति ओम नारायण राय की डिवीजन बेंच में इसे चुनौती दी।
शुक्रवार को सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने एकल पीठ का आदेश वापस लेते हुए अंतरिम संरक्षण समाप्त कर दिया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया कि एकल पीठ ने किस कानूनी प्रावधान के तहत मिलन प्रधान को यह अंतरिम राहत दी थी।
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी पूछा कि मिलन प्रधान ने अग्रिम जमानत (एंटिसिपेटरी बेल) की मांग करने के बजाय अंतरिम संरक्षण की याचिका क्यों दायर की।
अदालत ने टिप्पणी की कि चुनाव लड़ना मिलन प्रधान का अधिकार है, लेकिन कानून का उल्लंघन करके नहीं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “कानून की नजर में सभी समान हैं। चुनाव लड़ने से कोई व्यक्ति विशेष नहीं हो जाता। वीआईपी और आम नागरिक में कोई अंतर नहीं है।”
नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होंगे, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
गौरतलब है कि मिलन प्रधान को 18 सितंबर की शाम गिरफ्तार किया गया था। उसी दिन पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की थी कि उनकी अगुवाई वाला तृणमूल कांग्रेस गुट नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन करेगा। इसके कुछ समय पहले ही तृणमूल उम्मीदवार संचिता डे प्रधान ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। विपक्षी एकजुटता की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था।
