SGSU Advertisement
Home Student & Youth सीबीएसई टॉकाथॉन में युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रखने के लिए...

सीबीएसई टॉकाथॉन में युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रखने के लिए जागरूकता और सहयोग पर जोर

0
6

नई दिल्ली, 20 सितंबर (आईएएनएस)। सीबीएसई टॉकाथॉन में एक्सपर्ट्स और स्टूडेंट्स ने स्कूल के स्टूडेंट्स के बीच नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल की चुनौती और इसे रोकने के तरीकों पर चर्चा की।

इस इंटरैक्टिव सेशन में नोएडा के मयूर स्कूल की प्रिंसिपल अल्का अवस्थी, एम्स, नई दिल्ली के साइकियाट्री डिपार्टमेंट के प्रोफेसर नंद कुमार, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के एडिशनल डायरेक्टर अनीश सी और पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय के 12वीं क्लास के स्टूडेंट्स साम्या और रोहित शामिल हुए।

सीबीएसई टॉकाथॉन, सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन द्वारा आयोजित लाइव वर्चुअल सेशन की एक सीरीज है, जिसमें एक्सपर्ट्स स्टूडेंट्स और टीचर्स से सेहत और पढ़ाई से जुड़े मुद्दों पर सीधे बात करते हैं। इसका एक खास सेशन ‘नशा मुक्त युवा’ कैंपेन पर केंद्रित था, जिसका मकसद नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाना था।

नंद कुमार ने बताया कि ड्रग्स सबसे पहले दिमाग के ‘रिवॉर्ड सर्किट’ को बहुत ज्यादा एक्टिव करके उस पर असर डालते हैं, जिससे बहुत ज्यादा खुशी मिलती है, जिसकी तुलना आम जिंदगी के अनुभवों से नहीं की जा सकती। इससे यूजर्स बार-बार उस चीज को लेना चाहते हैं और आखिरकार उस पर निर्भर हो जाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जहां शराब लिवर और पेट को नुकसान पहुंचाती है और सिगरेट फेफड़ों और गले को नुकसान पहुंचाती है, वहीं दिमाग हमेशा पहला टारगेट होता है।

इस गलतफहमी का जवाब देते हुए कि कभी-कभार शराब पीने से लत नहीं लगती, अनीश ने चेतावनी दी कि कभी-कभार सेवन करने से भी लत लगने का खतरा बढ़ जाता है। दिमाग इस चीज को आराम से जोड़ने लगता है और धीरे-धीरे तनाव से निपटने के स्वस्थ तरीकों की जगह यह आदत ले लेती है।

प्रिंसिपल अल्का अवस्थी ने इस बात पर जोर दिया कि नशीले पदार्थों का सेवन किसी भी मात्रा में सुरक्षित नहीं है, क्योंकि यह तनाव से निपटने का एक ऐसा अस्थायी तरीका बनाता है जो आखिरकार लत का कारण बनता है।

अचानक नशा छोड़ने से जुड़ी चिंताओं पर बात करते हुए नंद कुमार ने कहा कि ध्यान, एकाग्रता और नींद में मामूली बदलाव लत के सामान्य लक्षण हैं और बताते हैं कि पेशेवर मदद की जरूरत है। उन्होंने इस धारणा को भी गलत बताया कि नशीले पदार्थों से एकाग्रता बढ़ती है, और इसे एक खतरनाक गलतफहमी कहा।

हानिकारक आदतों से प्रभावित दोस्तों की मदद करने के बारे में अवस्थी ने युवाओं को सलाह दी कि वे सहानुभूति और धैर्य दिखाएं और साथ ही अपनी चिंता भी साफ-साफ बताएं। अगर कोई दोस्त प्रतिक्रिया न दे, तो उन्हें माता-पिता, स्कूल काउंसलर या पीयर एजुकेटर्स (साथी शिक्षक) की मदद लेनी चाहिए। सीबीएसई स्कूलों में पहले से ही पीयर एंबेसडर और एजुकेटर्स होते हैं जो क्लास के साथियों पर नजर रखते हैं और चिंताओं की रिपोर्ट करते हैं।