नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मृदा स्वास्थ्य में सुधार और सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए गुरुवार से 30 नवंबर तक चलने वाला राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान-रबी 2026’ शुरू करेगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा हरियाणा के करनाल से शुरू किए जाने वाले इस अभियान का उद्देश्य किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों और अन्य कृषि इनपुट के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग के बारे में जागरूक करना है।
यह अभियान तिलहन, दलहन और बागवानी अभियानों के माध्यम से फसल विविधीकरण को बढ़ावा देगा, धान की कटाई के बाद परती खेतों के प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करेगा और फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देगा।
यह अभियान जैविक और जैव-आधारित कृषि उत्पादों के उचित उपयोग में किसानों को प्रशिक्षण देने और जागरूकता कार्यक्रमों, प्रशिक्षण सत्रों और क्षेत्र प्रदर्शनों के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
बयान में कहा गया कि इसके अतिरिक्त, यह अभियान जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण पर जोर देगा, साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करेगा।
अभियान जल उपयोग दक्षता बढ़ाने और संसाधन-कुशल एवं जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने को प्रोत्साहित करने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
उर्वरकों के उचित उपयोग, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और उपयुक्त फसलों और किस्मों के साथ अंतर्फसल खेती के बारे में जागरूकता पैदा करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
कृषि मशीनीकरण और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र प्रदर्शन इस अभियान के प्रमुख घटक होंगे।
यह अभियान किसान पहचान पत्र बनाने में भी सहायता करेगा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत फसल बीमा के बारे में जागरूकता बढ़ाएगा, व्यापक प्रयासों के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के तहत कवरेज का विस्तार करेगा और व्यापार समझौतों से उत्पन्न होने वाले लाभों और अवसरों के बारे में जानकारी प्रसारित करेगा।
अभियान के अंतर्गत राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम, किसान सम्मेलन, किसान चौपाल, प्रशिक्षण सत्र और क्षेत्र प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
राज्य कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), आईसीएआर संस्थान, राज्य कृषि विश्वविद्यालय और कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसियां (एटीएमए) कृषि वैज्ञानिकों, एटीएमए पदाधिकारियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और प्रगतिशील किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सहयोग करेंगी।
स्थानीय भाषा की सामग्री, रेडियो, दूरदर्शन, सोशल मीडिया और अन्य सूचना एवं संचार गतिविधियों के माध्यम से प्रचार-प्रसार से किसानों तक पहुंच मजबूत होगी और सूचना का व्यापक प्रसार सुनिश्चित होगा।
