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पीएम-आरकेवीवाई के तहत 10 राज्यों को 1,200 करोड़ रुपए से अधिक की मंजूरी, कृषि विकास को मिलेगी नई गति

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नई दिल्ली, 29 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के तहत 10 राज्यों के कृषि मंत्रियों को 1,200 करोड़ रुपए से अधिक के वित्तीय स्वीकृति पत्र सौंपे। सरकार का कहना है कि इस राशि से राज्यों में कृषि विकास योजनाओं का क्रियान्वयन और तेज होगा तथा किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

जारी राशि में पश्चिम बंगाल को 290 करोड़ रुपए, हरियाणा को 198 करोड़ रुपए, छत्तीसगढ़ को 181 करोड़ रुपए, अरुणाचल प्रदेश को 154 करोड़ रुपए, बिहार को 114 करोड़ रुपए, कर्नाटक को 104 करोड़ रुपए, मिजोरम को 75 करोड़ रुपए, हिमाचल प्रदेश को 64 करोड़ रुपए, झारखंड को 58 करोड़ रुपए और पंजाब को 43 करोड़ रुपए शामिल हैं।

विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों को समय पर संसाधन उपलब्ध कराकर यह भी सुनिश्चित कर रही है कि योजनाओं का क्रियान्वयन बिना देरी के जमीन पर शुरू हो सके।

कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 के बाद से देश की कृषि वृद्धि दर 3 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो गई है। वहीं खाद्यान्न उत्पादन में औसत वार्षिक वृद्धि पहले लगभग 40 लाख टन थी, जो अब बढ़कर 84 लाख टन प्रति वर्ष हो गई है।

चौहान ने बताया कि केवल दो वर्षों में, यानी 2023-24 से 2025-26 के बीच, रबी खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड 205 लाख टन की वृद्धि दर्ज की गई है, जो भारतीय कृषि की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

सहकारी संघवाद को और मजबूत बनाने के लिए उन्होंने एक नई समीक्षा व्यवस्था की घोषणा की। इसके तहत केंद्र की तरह राज्यों के साथ भी हर महीने वर्चुअल समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। साथ ही राज्यों में कृषि मंत्री, कृषि सचिव, कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), एटीएमए और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को शामिल करते हुए एक मजबूत राज्य कृषि टीम गठित की जाएगी। जिला स्तर पर भी मासिक समीक्षा बैठकें आयोजित होंगी।

मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए चौहान ने 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाने की घोषणा की। इस अभियान में वैज्ञानिकों और अन्य प्रमुख हितधारकों की भागीदारी होगी। अभियान के दौरान मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि भूमि की उर्वरता और लाभकारी कीटों का संरक्षण किया जा सके।

उन्होंने पूर्वी भारत के राज्यों झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में धान की कटाई के बाद खाली पड़े क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर दलहन उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया।

रबी सीजन की तैयारियों को लेकर कृषि मंत्री ने कहा कि फसलों और उन्नत बीजों के संबंध में सिफारिशें मिट्टी में उपलब्ध नमी और जल संसाधनों को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश में खाद और बीजों की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन राज्यों को नकली उर्वरक, फर्जी बीज और घटिया कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।

किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें फसल कटाई के बाद प्रबंधन, वैज्ञानिक भंडारण और आधुनिक विपणन प्रणाली को मजबूत करना शामिल है।

चौहान ने कहा कि तुअर, उड़द और मसूर की सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 100 प्रतिशत सुनिश्चित की जाएगी और किसानों को भुगतान 48 घंटे के भीतर करने की व्यवस्था रहेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप भारत अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से उभर रहे नए अवसरों का लाभ उठाएगा। इसके जरिए भारतीय कृषि उत्पादों, फलों, सब्जियों और खाद्यान्न को वैश्विक बाजारों से जोड़ा जाएगा, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और भारत दुनिया की एक प्रमुख ‘फूड बास्केट’ के रूप में उभर सकेगा।