नई दिल्ली, 16 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय खान मंत्रालय सोमवार को पटना में अहम और ‘क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक’ की नीलामी के 8वें दौर पर एक रोड शो और नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (एनएमईडीटी) पर एक वर्कशॉप आयोजित कर रहा है।
बयान में कहा गया है कि नीलामी के इस 8वें दौर में 20 मिनरल ब्लॉक शामिल हैं, जिनमें 3 माइनिंग लीज और 17 कंपोजिट लाइसेंस ब्लॉक हैं। इनमें ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई), रेयर मेटल्स, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, मोलिब्डेनम, टंगस्टन, पोटाश, फॉस्फोराइट और ग्लौकोनाइट जैसे कई तरह के अहम और रणनीतिक मिनरल शामिल हैं।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कोयला और खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे करेंगे। इस मौके पर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, राज्य के खान मंत्री प्रमोद कुमार और राज्य सरकार, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) और मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (एमईसीएल) के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में इंडस्ट्री के प्रतिनिधि और संभावित निवेशक भी हिस्सा लेंगे।
इस रोड शो में संभावित निवेशकों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को नीलामी के लिए रखे गए ब्लॉक में मौजूद खनिजों की संभावनाओं, नीलामी के तरीके, बोली लगाने की प्रक्रिया और अहम व रणनीतिक खनिज सेक्टर में निवेश और भागीदारी के मौकों के बारे में जानकारी दी जाएगी। एमईसीएल खनिज ब्लॉकों के बारे में, एसबीआईसीएपीएस खनिज नीलामी प्रक्रिया और टेंडर डॉक्यूमेंट के बारे में, और एमएसटीसी ई-नीलामी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।
इस कार्यक्रम में कंपोजिट लाइसेंस धारकों के लिए खोज (एक्सप्लोरेशन) के खर्च की आंशिक भरपाई करने वाली एनएमईडीटी स्कीम पर भी एक प्रेजेंटेशन होगा। इसके बाद, स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत करने और नीलामी प्रक्रिया से जुड़े सवालों के जवाब देने के लिए एक ओपन-हाउस चर्चा होगी।
कार्यक्रम के दूसरे हिस्से में ‘खनिज खोज: योजना, क्रियान्वयन और रिपोर्टिंग’ पर एक वर्कशॉप होगी। इस वर्कशॉप में भारत में खनिज खोज की संभावनाओं, नेशनल जियोसाइंस डेटा रिपॉजिटरी (एनजीडीआर), एनजीडीआर का इस्तेमाल करके खोज ब्लॉकों को तैयार करने और खनिज खोज रिपोर्ट तैयार करने जैसे विषयों पर चर्चा होगी। साथ ही, डीएसआई के सीनियर अधिकारी टेक्निकल सेशन भी लेंगे।
यह पहल खोज को बढ़ावा देने, ‘क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक’ के विकास में तेजी लाने, प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने और भारत की खनिज सुरक्षा को मजबूत करने की सरकार की लगातार कोशिशों को दिखाती है। बयान में कहा गया है कि यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के बड़े विजन को भी सपोर्ट करता है, क्योंकि यह उभरती टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी और दूसरे रणनीतिक सेक्टर के लिए जरूरी खनिजों की घरेलू स्तर पर खोज और विकास को आसान बनाता है।

