चेन्नई में सियासी हलचल तेज, डीएमके और एआईएडीएमके के बीच 12 सीटों पर कड़ा मुकाबला

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चेन्नई, 29 मार्च (आईएएनएस)। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही चेन्नई एक निर्णायक राजनीतिक अखाड़ा बनकर उभरा है, जहां सत्ताधारी डीएमके और विपक्षी एआईएडीएमके के बीच कड़ा मुकाबला होने की पूरी तैयारी है।

राजधानी में दो ध्रुवों के बीच होने वाले इस मुकाबले का स्पष्ट संकेत यह है कि डीएमके और एआईएडीएमके चेन्नई की 16 विधानसभा सीटों में से 12 सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ सीधी टक्कर देंगी।

सीधी टक्करों का यह केंद्रीकरण इस बात को उजागर करता है कि दोनों पार्टियां महानगर क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाने को कितना रणनीतिक महत्व देती हैं।

कोलाथुर, आरके नगर, विल्लीवाक्कम, थिरु-वी-का नगर, एग्मोर, रॉयपुरम, हार्बर, चेपॉक-थिरुवल्लिकेनी, थाउजेंड लाइट्स, अन्ना नगर, विरुगंबक्कम और टी नगर जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सीधे मुकाबले होने की आशंका है। ये सभी क्षेत्र राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, जिनमें विविध जनसांख्यिकीय संरचनाएं और मजबूत पार्टी उपस्थिति है।

शेष निर्वाचन क्षेत्रों में चुनावी परिदृश्य अधिक खंडित है, जो गठबंधन संरचनाओं और क्षेत्रीय दलों द्वारा निर्धारित है।

मायलापुर में डीएमके का मुकाबला एआईएडीएमके-भाजपा गठबंधन से होने की संभावना है, जो राज्य में व्यापक गठबंधन की गतिशीलता को दर्शाता है। पेरम्बूर में पीएमके के साथ मुकाबला होने की आशंका है, जबकि सैदापेट में एएमएमके एक प्रमुख चुनौती के रूप में उभर सकती है, जिससे प्रतिस्पर्धा का एक और स्तर जुड़ जाएगा।

चेन्नई के अलावा, तिरुचिरापल्ली, कोयंबटूर और सलेम जैसे प्रमुख जिलों में भी इसी तरह के रुझान देखने को मिल रहे हैं, जहां डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सीधा मुकाबला होने की आशंका है। राजधानी की तरह ही इन क्षेत्रों में भी दोनों पार्टियों द्वारा जोरदार चुनाव प्रचार और रणनीतिक लामबंदी देखने को मिल सकती है।

राज्य स्तर पर, डीएमके और एआईएडीएमके लगभग 121 निर्वाचन क्षेत्रों में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी, जिससे चुनाव में उनकी केंद्रीय प्रतिद्वंद्विता और भी मजबूत होगी।

इसके अलावा, डीएमके का लगभग 18 निर्वाचन क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ सीधा मुकाबला होने की संभावना है, जिससे कई क्षेत्रों में बहुकोणीय प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।

चुनाव प्रचार में तेजी आने के साथ ही चेन्नई राजनीतिक ध्यान का केंद्र बना हुआ है, जहां पार्टियां शहरी मतदाताओं तक पहुंचने के प्रयासों को तेज कर रही हैं। शहर में होने वाले चुनाव परिणाम तमिलनाडु में सत्ता संतुलन निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।