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राजस्थान सीएम ने सरपंचों से किया संवाद, कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने पर दिया जोर

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जयपुर, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को प्रदेशभर के सरपंचों और पंचायती राज प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। इस दौरान ग्रामीण विकास, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने और जमीनी स्तर पर शासन व्यवस्था को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम जयपुर के माहेश्वरी पब्लिक स्कूल स्थित तक्षशिला ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। वहीं, विभिन्न जिला मुख्यालयों से प्रतिनिधि वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में गांवों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मजबूत पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण विकास को गति देने के साथ स्थानीय नेतृत्व को भी मजबूत बना सकती हैं।

उन्होंने सरपंचों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि गांव का कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से स्थानीय लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और उनके समाधान के लिए काम करने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान अपने गांवों में विकास के लिए नए और बेहतर प्रयास करने वाले सरपंचों को सम्मानित भी किया गया। इन प्रयासों में स्वच्छता अभियान, लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना, पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और पारंपरिक त्योहारों को संरक्षित रखने के लिए सामुदायिक भागीदारी जैसे कार्य शामिल थे।

एक आदिवासी क्षेत्र के सरपंच ने लड़कियों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी। इनमें छात्रावास का निर्माण और आसपास के गांवों की छात्राओं को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की पहल शामिल थी।

झुंझुनू जिले की एक सरपंच ने अपने गांव में शुरू किए गए ‘बर्तन बैंक’ के बारे में भी जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने जमीनी स्तर पर किए जा रहे इन प्रयासों की सराहना की और कहा कि ग्रामीण विकास में स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले नए प्रयोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका का जिक्र करते हुए भजनलाल शर्मा ने कहा कि किसी व्यक्ति का सरपंच के रूप में कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी उसकी पहचान लंबे समय तक सरपंच के रूप में बनी रहती है।

अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बावजूद जब वह अपने गांव जाते हैं तो वहां के लोग आज भी उन्हें ‘सरपंच साहब’ कहकर बुलाते हैं।

उन्होंने कहा कि यह पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों के बीच मजबूत और करीबी संबंध को दिखाता है।

मुख्यमंत्री ने बार-बार होने वाले चुनावों के कारण विकास कार्यों और सरकारी संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभाव का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास के काम लगातार चलते रहना जरूरी है। गांवों में चल रही परियोजनाएं बिना किसी अनावश्यक रुकावट के आगे बढ़ती रहें, इसे सुनिश्चित करने में सरपंचों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

भजनलाल शर्मा ने राज्य सरकार की रोजगार से जुड़ी पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि 1.94 लाख युवाओं को नियुक्तियां दी जा चुकी हैं, जबकि 1.22 लाख अन्य पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है।

उन्होंने एक बार फिर सरपंचों से कहा कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दीये तले अंधेरा नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यवस्था के सबसे करीब रहने वाले लोग ही उसके लाभ से वंचित न रह जाएं।

उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से लोगों की समस्याएं सुनने, स्थानीय स्तर पर उनका समाधान करने और जिन मामलों में सरकार के स्तर पर हस्तक्षेप की जरूरत हो, उन्हें प्रशासन के सामने रखने की अपील की।

कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री ओटाराम देवासी समेत अन्य जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

यह संवाद राजस्थान में होने वाले आगामी पंचायत चुनावों से पहले आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीण शासन व्यवस्था को मजबूत करने, जमीनी स्तर पर नए प्रयासों को बढ़ावा देने और गांवों में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बेहतर तरीके से लोगों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।