मुंबई, 9 जुलाई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई के पश्चिमी उपनगरों में लंबे समय से चली आ रही रियल एस्टेट की समस्याओं को हल करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने गुरुवार को प्रशासनिक निकायों को उन जर्जर इमारतों के पुनर्विकास में तेजी लाने का निर्देश दिया, जो सख्त विमानन और रक्षा सुरक्षा दिशानिर्देशों के बीच फंसी हुई हैं।
ये निर्देश एयरपोर्ट फनल जोन (सांताक्रूज, विले पार्ले और कुर्ला को कवर करने वाला क्षेत्र) के साथ-साथ जुहू सैन्य ट्रांसमीटर स्टेशन के आसपास सुरक्षा घेरे में स्थित इमारतों को लक्षित करते हैं।
ये आदेश विधान भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान जारी किए गए, जिसमें प्रमुख राज्य मंत्री और वरिष्ठ शहरी नियोजन अधिकारी शामिल हुए थे।
विमानों के सुरक्षित टेकऑफ और लैंडिंग के लिए निर्धारित हवाई क्षेत्र (अप्रोच फनल) पर लगाई गई ऊचाई सीमा के कारण ऐतिहासिक रूप से ये पुनर्विकास परियोजनाए बिल्डरों के लिए आर्थिक रूप से अव्यवहार्य रही हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए मुख्यमंत्री फडणवीस ने एक अभिनव ‘संभावित एफएसआई’ मॉडल पेश किया। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को निर्देश दिया गया है कि वह इन प्रतिबंधित भूखंडों से उत्पन्न अप्रयुक्त फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) या हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) का सटीक मानचित्रण करे।
राज्य सरकार सड़क चौड़ीकरण नियमों के अनुरूप एक एकीकरण नीति पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे डेवलपर्स को ऊंचाई-प्रतिबंधित भवन के उच्च संभावित एफएसआई को पड़ोसी या आस-पास के भूखंडों पर निर्माण परियोजनाओं के साथ जोड़ने या संयोजित करने की अनुमति मिलती है।
विकास संबंधी बाधाओं को व्यवस्थित रूप से दूर करने के लिए उच्च संभावित एफएसआई आवंटन आस-पास की सड़कों की चौड़ाई के आधार पर निर्धारित किए जाएंगे।
मुंबई में आवास संबंधी निगरानी संस्थाओं का सरलीकरण: तात्कालिक जोन संशोधनों के अलावा, मुख्यमंत्री ने मुंबई की प्रमुख आवास एजेंसियों के आपसी समन्वय में संरचनात्मक बदलाव का आदेश दिया है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि मुंबई भर में स्लम पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए), एमएचएडीए और सीआईडीसीओ जैसी कई एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम करती हैं। आगे चलकर, शहरी विकास विभाग को आवास प्रवर्तन को एकीकृत करने के लिए सर्वोच्च नियामक और निगरानी नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करना होगा।

