Monday, July 27, 2026
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सीएमएफआरआई ने लॉन्च किया ‘शार्क अवेयर’ ऐप, संकटग्रस्त समुद्री जीवों के संरक्षण को मिलेगी मजबूती

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कोच्चि, 27 जुलाई (आईएएनएस)। समुद्री संरक्षण और डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) ने दो तकनीक आधारित मंच शुरू किए हैं। इनका उद्देश्य संकटग्रस्त शार्क और रे मछलियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

सोमवार को संस्थान ने ‘शार्क अवेयर’ मोबाइल ऐप और एक इंटरैक्टिव ई-लर्निंग मॉड्यूल लॉन्च किया। यह समुद्री जैव विविधता के संरक्षण को मजबूत करने और इस क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राज्य के मत्स्य पालन मंत्री वी.ई. अब्दुल गफूर ने कोच्चि स्थित सीएमएफआरआई मुख्यालय में इन दोनों पहलों की शुरुआत की।

नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड (एनएफडीबी) की आर्थिक सहायता से तैयार किए गए इन प्लेटफॉर्म का उद्देश्य मछुआरों, मत्स्य विभाग के अधिकारियों, वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों, शोधकर्ताओं और छात्रों को शार्क और रे मछलियों की संरक्षित प्रजातियों की सही पहचान करने में मदद करना है। इससे संरक्षण से जुड़े नियमों का बेहतर तरीके से पालन सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

यह मोबाइल ऐप वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (2022 में संशोधित) की अनुसूची-1, अनुसूची-2 और अनुसूची-4 में शामिल संरक्षित शार्क और रे मछलियों की प्रजातियों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराता है।

प्रजातियों की पहचान के अलावा यह ऐप उपयोगकर्ताओं को इन समुद्री जीवों से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी, उन्हें मिली कानूनी सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े नियमों और इनके संरक्षण के पर्यावरणीय महत्व के बारे में आसान भाषा में जानकारी देता है।

सीएमएफआरआई के फिनफिश मत्स्य पालन विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. लिवी विल्सन, जिन्होंने इस परियोजना का नेतृत्व किया, ने बताया कि यह ऐप समुद्री मत्स्य पालन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों के बीच जानकारी की कमी को दूर करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा, “यह ऐप लोगों को संरक्षित शार्क और रे मछलियों की सही पहचान करने में मदद करेगा। साथ ही, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने और इन प्रजातियों के संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूत करेगा।”

उम्मीद है कि यह ऐप जल्द ही गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध होगा। इसके साथ एक संवादात्मक ऑनलाइन शिक्षण मॉड्यूल भी तैयार किया गया है, जिसकी मदद से उपयोगकर्ता प्रश्नोत्तरी, तुरंत मूल्यांकन और अपनी सीखने की प्रगति की जानकारी के जरिए अपनी सुविधा के अनुसार प्रशिक्षण ले सकेंगे।

यह डिजिटल मंच वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, लुप्तप्राय वन्य जीवों और वनस्पतियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधी सम्मेलन (साइट्स), प्रजातियों की पहचान करने के तरीकों और संरक्षित शार्क तथा रे मछलियों के संरक्षण के महत्व से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराता है।

यह पहल दिखाती है कि सीएमएफआरआई टिकाऊ मत्स्य पालन और जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर लगातार जोर दे रहा है।

संस्थान का मानना है कि वैज्ञानिक और कानूनी जानकारी को आसान तरीके से उपलब्ध कराने से लोगों में जागरूकता बढ़ेगी। इससे अधिक लोग संरक्षण के प्रयासों में भाग लेंगे, नियमों का पालन करेंगे और समुद्री जीवों की संकटग्रस्त प्रजातियों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।