तुमकुरु, 19 मई (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल में कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में, सिद्धारमैया ने मंगलवार को तुमकुरु जिला प्रशासन और जिला पंचायत द्वारा आयोजित ‘तीन साल की उपलब्धियों के प्रति समर्पण सम्मेलन’ का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर, उन्होंने ‘नव कर्नाटक’ विकास मॉडल प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया और तुमकुरु जिले में 682 करोड़ रुपए की प्रमुख विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी।
गृह मंत्री जी. परमेश्वर के नेतृत्व और राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा की देखरेख में आयोजित इस विशाल सम्मेलन में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, सभी कैबिनेट मंत्री और विधायक उपस्थित थे।
‘तीन साल की उपलब्धियों के प्रति समर्पण सम्मेलन’ का उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि परमेश्वर और राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने इस कार्यक्रम का आयोजन सार्थक और स्वेच्छा से किया है।
सिद्धारमैया ने कहा कि गृह मंत्री जी. परमेश्वर की अध्यक्षता में तैयार किए गए पार्टी के चुनावी घोषणापत्र में किए गए 580 वादों में से कांग्रेस सरकार ने 290 से अधिक वादे पूरे कर दिए हैं और आश्वासन दिया कि शेष वादे भी अगले दो वर्षों के भीतर पूरे कर दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद पांच गारंटी योजनाओं को लागू कर दिया था और जनता से किए गए कई अन्य वादों को पूरा करने की दिशा में भी काम किया था।
उन्होंने कहा कि हमने सभी जातियों और धर्मों के लोगों के विकास के लिए काम किया है। हमने सभी समुदायों के गरीब लोगों को सशक्त बनाया है। भाजपा के विपरीत, हमने जाति और धर्म के नाम पर विभाजनकारी राजनीति नहीं की।
भाजपा पर निशाना साधते हुए सिद्धारमैया ने दावा किया कि ‘कर्नाटक विकास मॉडल’ ‘गुजरात मॉडल’ से बेहतर है।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा गुजरात में 35 वर्षों से सत्ता में है, लेकिन वहां वास्तविक विकास नहीं हुआ है। गुजरात में हाल ही में हुई एक घटना, जिसमें एक मकान मालिक ने 2,500 रुपए के बकाया किराए को लेकर एक गरीब किरायेदार परिवार की 13 वर्षीय लड़की का यौन उत्पीड़न किया, गुजरात के वास्तविक मॉडल को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री ने ईंधन और अन्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना भी की।
सिद्धारमैया ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले डीजल, पेट्रोल और सोने की कीमतें काफी कम थीं। आज कीमतें आसमान छू रही हैं। गरीब और मध्यम वर्ग दोनों ही इससे पीड़ित हैं।

