जयपुर, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान में हाल ही में हुए शहरी निकाय चुनावों के दौरान क्रॉस-वोटिंग और संगठनात्मक खामियों के आरोपों की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। पार्टी ने कई नगर निकायों में मिली हार की समीक्षा के लिए नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है।
राजस्थान विधानसभा के पूर्व स्पीकर डॉ. सी.पी. जोशी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी कई स्थानीय निकायों में पार्टी की हार, क्रॉस-वोटिंग के आरोपों और खराब फ्लोर मैनेजमेंट की जांच करेगी।
कमेटी को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। कमेटी में रामसिंह कस्वां, मुरारीलाल मीणा, कुलदीप इंदौरा, प्रमोद जैन भाया, शकुंतला रावत, हाकम अली, गणेश घोगरा और रघुवीर सिंह राठौड़ शामिल हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अलग-अलग जिलों से उन पार्षदों के बारे में रिपोर्ट इकट्ठा की है, जिन पर मेयर और चेयरमैन के चुनाव के दौरान पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ वोट करने का आरोप है।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि क्रॉस-वोटिंग के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले पार्षदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी चल रही है। रिपोर्टों से पता चला है कि जांच के दायरे में आने वाले कांग्रेस पार्षदों की संख्या सैकड़ों में हो सकती है, हालांकि अंतिम संख्या जांच और हर मामले की पुष्टि पर निर्भर करेगी।
यह विवाद तब और बढ़ गया जब कई स्थानीय निकायों में कांग्रेस के पास बड़ी संख्या में पार्षद होने के बावजूद पार्टी के उम्मीदवार चुनाव हार गए।
उदाहरण के लिए, बीकानेर में कांग्रेस के पास 41 पार्षद थे और भाजपा के पास 27, लेकिन भाजपा उम्मीदवार ने डिप्टी मेयर का चुनाव 40-38 से जीत लिया, जिससे क्रॉस-वोटिंग के आरोप लगे और जांच की मांग उठी।
कांग्रेस नेतृत्व ने अजमेर, कोटा और पाली सहित नगर निगमों और अन्य स्थानीय निकायों में पार्टी के प्रदर्शन पर भी ध्यान दिया है। कांग्रेस ने पहले पार्षदों के प्रभावित होने या पार्टी उम्मीदवारों के खिलाफ वोट करने के आरोपों पर रिपोर्ट मांगी थी। पार्टी को अपने ही नेताओं से नागरिक निकायों के गठन की प्रक्रिया के दौरान पार्षदों को संभालने के तरीके को लेकर भी आरोपों का सामना करना पड़ा था।
जांच कमेटी इन हार के कारणों और पार्टी नेताओं व पार्षदों की भूमिका की जांच करेगी।
राजस्थान कांग्रेस के भीतर चर्चा का एक और मुद्दा भीलवाड़ा विवाद है, जहां जरूरी अथॉरिटी लेटर समय पर जमा न होने के कारण कांग्रेस के 17 उम्मीदवार पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव नहीं लड़ पाए थे। इस मुद्दे ने स्थानीय कांग्रेस संगठन के भीतर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया और मामला पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंच गया।
बाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रभावित उम्मीदवारों की याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिससे कांग्रेस द्वारा अधिकृत 53 उम्मीदवार ही मैदान में रह गए। भीलवाड़ा में कांग्रेस नेता इस घटना की जिम्मेदारी को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
हाल ही में जिला कांग्रेस कार्यालय के बाहर पीसीसी सदस्य मनोज पालीवाल के विरोध-प्रदर्शन ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। स्थानीय वरिष्ठ नेताओं धीरज गुर्जर और रामलाल जाट की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया था कि चुनाव के बाद की प्रक्रिया के दौरान उसके पार्षदों पर दबाव डाला गया, उन्हें प्रलोभन दिए गए और उनके वोट को प्रभावित करने की कोशिशें की गईं। इसके बाद पीसीसी प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रशासन और पुलिस से जुड़े इन आरोपों की राज्य चुनाव आयोग से जांच कराने की मांग की।
