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कर्नाटक में एमएलसी चुनाव में चारों सीटों पर हार के बाद कांग्रेस में जुबानी जंग छिड़ी

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बेंगलुरु, 3 नवंबर (आईएएनएस)। हाल ही में हुए विधान परिषद चुनावों में कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस को चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद मंगलवार को पार्टी के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थकों के बीच जुबानी जंग छिड़ गई।

एमएलसी चुनावों में एनडीए ने चारों सीटें जीत लीं, जबकि भाजपा को तीन और जेडी(एस) को एक सीट मिली।

पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक केएन राजन्ना ने कहा कि स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े विवाद ने पार्टी की छवि को बुरी तरह प्रभावित किया है और एमएलसी चुनावों में उसके खराब प्रदर्शन का कारण हो सकता है।

हालांकि, नगर प्रशासन मंत्री एचसी बालकृष्ण ने राजन्ना और उनके बेटे पर पार्टी के उम्मीदवारों के लिए काम न करने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की।

मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए राजन्ना ने कहा कि स्टिंग ऑपरेशन विवाद ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया है, खासकर इसलिए क्योंकि स्नातकों और शिक्षकों के निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता शिक्षित हैं और अपना निर्णय लेने से पहले राजनीतिक घटनाक्रम का विश्लेषण करने में सक्षम हैं।

उन्होंने कहा कि दक्षिण-पूर्वी निर्वाचन क्षेत्र में जहां एमएलसी पद के लिए चुनाव हुए थे, वहां हमारे पास 26 विधायक हैं और इसके बावजूद हमें हार का सामना करना पड़ा है। इससे क्या संकेत मिलता है? भ्रम की स्थिति है। सिद्धारमैया के चुनाव न लड़ने या प्रचार न करने के बयानों ने भी पार्टी को नकारात्मक संदेश दिया है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इन सब बातों ने पार्टी को प्रभावित किया है।

राजन्ना ने कहा कि स्टिंग ऑपरेशन विवाद ने मतदाताओं को प्रभावित किया होगा, जिन्होंने अपने असंतोष को वोटों के माध्यम से व्यक्त किया होगा।

राजन्ना ने दक्षिण-पूर्वी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का जिक्र भी किया, जिसमें तुमकुरु जिला शामिल है। राजन्ना ने कहा कि कांग्रेस के पास इस क्षेत्र में 26 विधायक हैं, लेकिन फिर भी उसे जीत हासिल करने में सफलता नहीं मिली।

उन्होंने कहा कि हम सभी को इस हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। अगर हम स्थिति का सही आकलन करें, तो मेरे सहित सभी 26 विधायकों को इस्तीफा दे देना चाहिए। सभी को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और परिणाम देने चाहिए। अगर वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें दंडित किया जाना चाहिए।

राजन्ना की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बालकृष्ण ने आरोप लगाया कि न तो राजन्ना और न ही उनके बेटे ने चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए प्रभावी ढंग से काम किया।

उन्होंने कहा कि वे शपथ लें और सच बताएं कि क्या उन्होंने चुनाव के दौरान पार्टी के लिए काम किया था। उन्होंने कांग्रेस के लिए वोट नहीं जुटाए। वे किसी मंदिर में आकर शपथ लें। मैं भी आऊंगा। मैं उन्हें चुनौती देता हूं।

बालकृष्ण ने आरोप लगाया कि राजन्ना और उनके बेटे ने पार्टी के खिलाफ गतिविधियां कीं और चुनाव प्रचार के दौरान उनके आचरण पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव खत्म होने से पहले ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री और जेडी(एस) नेता एचडी कुमारस्वामी के साथ तस्वीरें खिंचवाई थीं।

उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रदर्शन पर बोलने का उन्हें क्या नैतिक अधिकार है? अगर पार्टी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है, तो उसे भविष्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। पार्टी के खिलाफ काम करने वालों को दंडित किया जाना चाहिए।

बालकृष्ण ने कहा कि चुनाव जीतना या हारना उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ खड़े रहना और संगठन के लिए काम करना। उन्होंने राजन्ना से स्पष्ट करने को कहा कि क्या उन्होंने और उनके बेटे ने कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया था।

मंत्री ने कहा कि क्या किसी ने राजन्ना के खिलाफ कोई स्टिंग ऑपरेशन किया है? अगर वह पार्टी छोड़ना चाहते हैं, तो छोड़ सकते हैं। लेकिन पार्टी में रहते हुए वह पार्टी के साथ विश्वासघात नहीं कर सकते। उन्हें जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए।