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ओडिशा: राजमार्गों पर अवैध पार्किंग से बढ़ी चिंता, धर्मेंद्र प्रधान ने कार्रवाई की अपील की

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भुवनेश्वर, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। पूर्व केंद्रीय मंत्री और संबलपुर सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर राज्य में पार्किंग संबंधी समस्या उठाई है। प्रधान ने मुख्यमंत्री से राज्य के प्रमुख खनन और औद्योगिक क्षेत्रों में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर वाणिज्यिक और भारी वाहनों की अवैध और खतरनाक पार्किंग के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उपाय करने का आग्रह किया।

अपने पत्र में प्रधान ने कहा कि राज्य के खनन और औद्योगिक गलियारों में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि ट्रक और अन्य वाहन सड़कों पर कई किलोमीटर तक लंबी कतारों में अवैध और खतरनाक तरीके से पार्क किए जाते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि खनन कंपनियों द्वारा रसद अनुशासन का अभाव और निर्धारित पार्किंग स्थलों की अनुपस्थिति सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है। हालांकि, राज्य सरकार के पास इस समस्या को दूर करने के लिए प्रत्यक्ष संवैधानिक दायित्व और मजबूत कानूनी शक्तियां हैं।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान याचिका पर दिए गए आदेश के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि (सी) संख्या 9/2025 (फलोदी दुर्घटना बनाम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य) के संदर्भ में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि राजमार्गों पर सुरक्षित यात्रा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है।

प्रधान ने कहा कि अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों और वाहनों की आवाजाही के लिए निर्धारित अन्य क्षेत्रों में भारी और वाणिज्यिक वाहनों की पार्किंग पर प्रतिबंध लगाने वाले बाध्यकारी अंतरिम निर्देश जारी किए हैं।

उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को चौबीसों घंटे गश्ती दल, स्वचालित ई-चालान प्रणाली और जिला सड़क सुरक्षा कार्यबल के माध्यम से अवैध पार्किंग हटाने के लिए जवाबदेह ठहराने का निर्देश दिया है।

संबलपुर सांसद ने कहा कि ओडिशा राज्य राजमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 2025, इसके प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले चालकों, परिवहन संचालकों और औद्योगिक कंपनियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक, वित्तीय और आपराधिक दंड का प्रावधान करता है। धारा 28 के तहत, सड़कों पर खतरनाक तरीके से वाहन चलाने वालों पर 1,000 रुपए से 5,000 रुपए तक का अनिवार्य जुर्माना लगाया जा सकता है। इसमें यह भी प्रावधान है कि यदि जुर्माना एक महीने तक अदा नहीं किया जाता है तो जब्त किए गए वाहनों की नीलामी की जा सकती है।