नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भारत के पांच सूत्रीय दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करती है, बिना बाधा के समुद्री व्यापार का पक्ष लेती है, और व्यापार और संसाधनों का “एक हथियार” के तौर पर इस्तेमाल करने का कड़ा विरोध करती है।
हैदराबाद हाउस में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका विभिन्न क्षेत्रों में नियमित संपर्क और रणनीतिक समन्वय बनाए हुए हैं।
उन्होंने कहा, “यह सचिव (रूबियो) की पहली भारत यात्रा, लेकिन उनके पद संभालने के बाद से हम लगातार संपर्क में रहे हैं। इसमें वाशिंगटन डी.सी. और न्यूयॉर्क में मुलाकातें शामिल हैं, और अन्य कार्यक्रमों के दौरान भी बातचीत हुई है। हाल ही में फ्रांस में हुई बैठक भी इसमें शामिल है। यह निरंतर संवाद दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग में सहायक रहा है।”
नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच राजनीतिक समझ को रेखांकित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी कई क्षेत्रों में साझा हितों पर आधारित है।
उन्होंने कहा, “भारत और अमेरिका के बीच राजनीतिक समझ एक रणनीतिक साझेदारी के तौर पर है, जो कई क्षेत्रों में राष्ट्रीय हितों के मेल से उत्पन्न होती है।”
महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण बताते हुए जयशंकर ने कहा कि नई दिल्ली संवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन, आर्थिक मजबूती और भरोसेमंद साझेदारी को लेकर प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, “पहला, हम संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करते हैं। दूसरा, हम सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार के पक्ष में हैं। तीसरा, हम अंतरराष्ट्रीय कानून के सख्त पालन की मांग करते हैं। चौथा, हम बाजार हिस्सेदारी और संसाधनों के हथियार की तरह इस्तेमाल करने के खिलाफ हैं। और पांचवां, हम वैश्विक अर्थव्यवस्था को जोखिमों से बचाने के लिए भरोसेमंद साझेदारी और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं में विश्वास रखते हैं।”
जयशंकर ने बताया कि रूबियो ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी, जिसमें विभिन्न वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि उनकी अपनी बैठक में पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्वी एशिया की घटनाओं पर चर्चा हुई, साथ ही कैरेबियाई क्षेत्र की उनकी हालिया यात्रा पर भी विचार-विमर्श हुआ।
उन्होंने कहा, “रविवार दोपहर के भोजन के दौरान हमारी बातचीत खाड़ी क्षेत्र के नवीनतम घटनाक्रमों पर केंद्रित होगी। कुछ घटनाएं रातोंरात हुई हैं या हो रही हैं, और साथ ही यूक्रेन संघर्ष पर भी चर्चा होगी। इंडो-पैसिफिक भी 26 मई को होने वाली क्वाड बैठक के एजेंडे में है।”
विदेश मंत्री ने हाल ही में नवीनीकृत 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा साझेदारी समझौते का उल्लेख किया। साथ ही पानी के नीचे डोमेन जागरूकता पर रोडमैप पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आगे बढ़ते हुए “मेक इन इंडिया” दृष्टिकोण और हालिया संघर्षों से मिले सबक को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
आर्थिक सहयोग पर उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर चर्चा की, जो आगे चलकर व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में कदम होगा।
ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु सहयोग पर कहा कि दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों पर भी विस्तार से चर्चा हुई और ऊर्जा व्यापार में विविधता भारत की प्राथमिकता है।
एस. जयशंकर के अनुसार, शांति अधिनियम के पारित होने से परमाणु सहयोग के नए अवसर खुले हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं बढ़ी हैं।
उभरती तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर भी चर्चा हुई।
आतंकवाद पर उन्होंने कहा कि भारत की नीति “शून्य सहिष्णुता” की है और दोनों देशों की एजेंसियां इस दिशा में मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने 26/11 मुंबई हमलों के एक प्रमुख साजिशकर्ता के प्रत्यर्पण का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सहयोग जारी रखेंगे।

