तमिलनाडु: बहुमत से दूर टीवीके, विजय को समर्थन नहीं देंगे डीएमके के सहयोगी

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चेन्नई, 5 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। इसी बीच, डीएमके-नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रमुख सहयोगी दलों ने अभिनेता-राजनेता विजय को समर्थन देने से इनकार के संकेत दिए हैं। इससे तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के सत्ता तक पहुंचने का रास्ता मुश्किल नजर आ रहा है, जबकि वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

23 अप्रैल को एक चरण में हुए विधानसभा चुनाव में डीएमके, एआईएडीएमके, नाम तमिलर कच्ची और टीवीके के बीच चार-कोणीय मुकाबला हुआ था। 4 मई को मतगणना पूरी होने के बाद, 234-सदस्यीय सदन में टीवीके को 108 सीटें मिलीं, जो बहुमत के 118 के आंकड़े से कम है।

मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) के महासचिव वाइको ने साफ कहा कि डीएमके गठबंधन के दल विजय को समर्थन देने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा, “गठबंधन सहयोगियों में टीवीके की ओर जाने का कोई इरादा नहीं है,” जिससे किसी भी संभावित सियासी पुनर्संरेखण की संभावना लगभग खत्म हो गई है।

वहीं, विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) के नेता थोल. तिरुमावलवन ने भी इसी तरह का रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वामपंथी दलों और वीसीके का लंबे समय से वैचारिक गठजोड़ रहा है और वे आगे भी सामूहिक रूप से बड़े फैसले लेते रहेंगे। उन्होंने कहा, “हमने अब तक टीवीके को समर्थन देने पर विचार नहीं किया है।”

इस बीच, देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके) की नेता प्रेमलता विजयकांत ने भी समर्थन देने को लेकर कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई। उन्होंने विजय और अपने दिवंगत पति विजयकांत के बीच व्यक्तिगत संबंधों का जिक्र करते हुए कहा, “विजय हमारे परिवार के बेटे जैसे हैं। हम उन्हें जीत की बधाई देते हैं,” लेकिन पार्टी के स्वतंत्र रुख को दोहराया।

डीएमडीके, जिसने डीएमके गठबंधन के साथ 10 सीटों पर चुनाव लड़ा था, केवल एक सीट विरुधाचलम पर जीत हासिल कर सकी। प्रेमलता ने कहा कि गठबंधन में जश्न का माहौल नहीं है और 1962 की तरह स्थिति है, जब सी.एन. अन्नादुरई के हारने पर डीएमके ने जश्न नहीं मनाया था।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान स्थिति कुछ वैसी ही है, क्योंकि डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन को भी इस बार हार का सामना करना पड़ा है।

राजनीतिक गतिरोध के बीच विजय ने चेन्नई के पनैयूर स्थित पार्टी कार्यालय में नव-निर्वाचित विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक शुरू कर दी है। संभावित सहयोगियों से स्पष्ट समर्थन न मिलने के कारण आने वाले दिन अहम माने जा रहे हैं, जब वे बहुमत जुटाने और सरकार बनाने का दावा पेश करने के विकल्प तलाशेंगे।