Thursday, July 2, 2026
SGSU Advertisement
Home राजनीति डीएमके ने तमिलनाडु के राज्यपाल से की मांग, एमडीएमके विधायकों को इस्तीफा...

डीएमके ने तमिलनाडु के राज्यपाल से की मांग, एमडीएमके विधायकों को इस्तीफा दिलाने की कथित साजिश की डीवीएसी जांच हो

0
5

चेन्नई, 1 जुलाई (आईएएनएस)। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) ने बुधवार को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र वी. अर्लेकर से हस्तक्षेप की मांग करते हुए मुख्यमंत्री विजय और मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एमडीएमके) के महासचिव वाइको पर दो विधायकों को विधानसभा से इस्तीफा देने के लिए कथित रूप से प्रलोभन देने के मामले की निदेशालय सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक (डीवीएसी) से जांच कराने का अनुरोध किया।

डीएमके के संगठन सचिव आर.एस. भारती ने राज्यपाल और डीवीएसी को सौंपे गए विस्तृत ज्ञापन में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री विजय और वाइको ने कथित तौर पर कडायनल्लूर से विधायक टी.एम. राजेंद्रन और सिर्काझी से विधायक एस. सेंथिल सेल्वन को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने और बाद में उपचुनाव लड़ने के लिए प्रेरित करने की साजिश रची।

हालांकि दोनों विधायक एमडीएमके से जुड़े हैं, लेकिन वे पिछले गठबंधन के तहत डीएमके के चुनाव चिह्न ‘राइजिंग सन’ पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।

डीएमके का कहना है कि इन दोनों विधायकों से इस्तीफा दिलाने की कोई भी कोशिश राजनीतिक प्रलोभन के जरिए विधानसभा की मौजूदा संरचना को असंवैधानिक तरीके से बदलने का प्रयास है।

पार्टी की शिकायत एमडीएमके की आम परिषद की बैठक में वाइको द्वारा दिए गए कथित बयान पर आधारित है।

आर.एस. भारती के अनुसार, वाइको ने बैठक में दावा किया कि मुख्यमंत्री विजय ने अपने पट्टिनापक्कम स्थित आवास पर हुई मुलाकात के दौरान उनसे दोनों विधायकों को इस्तीफा देने के लिए मनाने का अनुरोध किया था।

भारती ने आरोप लगाया कि वाइको ने यह भी कहा कि यदि दोनों विधायक इस्तीफा देकर उपचुनाव लड़ते हैं, तो मुख्यमंत्री विजय स्वयं उनके पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे।

डीएमके ने कहा कि यदि वाइको के ये बयान सही हैं, तो यह निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को राजनीतिक प्रलोभन देकर प्रभावित करने और “हॉर्स ट्रेडिंग” का स्पष्ट मामला बनता है।

पार्टी का यह भी कहना है कि इस तरह की कार्रवाई जनता द्वारा चुने गए विधायकों के संवैधानिक जनादेश में हस्तक्षेप है।

राज्यपाल को दिए गए ज्ञापन में आर.एस. भारती ने आरोप लगाया कि वाइको के सार्वजनिक बयान स्वयं मुख्यमंत्री विजय की कथित भूमिका की ओर इशारा करते हैं, इसलिए इस मामले में आपराधिक जांच आवश्यक है।

डीएमके ने राज्यपाल अर्लेकर से अपील की कि वह इस कथित भ्रष्ट आचरण पर “आंखें बंद” न करें, क्योंकि इससे संवैधानिक मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंचती है।

पार्टी ने राज्यपाल से डीवीएसी को तत्काल प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर कानून के अनुसार व्यापक जांच कराने का निर्देश देने की मांग की।

भारती ने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा संज्ञेय अपराधों के पंजीकरण और जांच को लेकर तय सिद्धांतों के अनुसार डीवीएसी का इस शिकायत पर कार्रवाई करना उसका कानूनी दायित्व है।