चंडीगढ़, 5 मई (आईएएनएस)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक संगोष्ठी और प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का सपना महिलाओं के विकास के माध्यम से ही साकार हो सकता है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण से ही देश नई ऊंचाइयों को छूएगा।
उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र वह भूमि है जहां भगवान कृष्ण ने महाभारत के दौरान गीता का संदेश देकर अर्जुन को कर्तव्य और धर्म का मार्ग दिखाया था। महाभारत का युद्ध केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध था। एक स्त्री का अपमान समाज को यह संदेश देता है कि अन्याय के सामने चुप रहना भी अन्याय है।
उन्होंने आगे कहा कि आज भी समाज को इसी विचारधारा का अनुसरण करते हुए अन्याय के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए।
इससे पहले, मुख्यमंत्री सैनी ने क्रश हॉल में स्थापित महिला सशक्तिकरण प्रदर्शनी का दौरा किया और सभागार में आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन दीप प्रज्वलित करके वंदे मातरम गाकर किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार की गई संगोष्ठी की स्मृति चिन्ह और कला महोत्सव की स्मृति चिन्ह भी जारी की।
महिलाओं को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के बिना ‘विकसित भारत’ का सपना साकार नहीं हो सकता।
उन्होंने विकसित भारत के चार प्रमुख स्तंभों – महिलाओं, किसानों, युवाओं और गरीबों – को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने आगे कहा कि किसानों को सशक्त बनाना राष्ट्र की नींव को मजबूत करता है, जबकि युवाओं को नौकरी चाहने वालों के बजाय रोजगार सृजनकर्ता बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। गरीबों को सशक्त बनाना भी राष्ट्र निर्माण में एक प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। एक समय था जब परिवार अपनी बेटियों को शिक्षा के लिए दूर भेजने में हिचकिचाते थे, और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण कई लड़कियां पढ़ाई से वंचित रह जाती थीं।
इस समस्या को समझते हुए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई, और अब हर 20 किलोमीटर के दायरे में कॉलेज स्थापित किए गए हैं ताकि लड़कियों को दूर यात्रा न करनी पड़े और वे सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई कर सकें।

