नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। सरकार द्वारा मंगलवार को संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 863.1 अरब डॉलर का अब तक का सबसे अधिक निर्यात (एक्सपोर्ट) दर्ज किया। विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स-एफटीए) ने भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच दिलाने, निर्यात में विविधता बढ़ाने और श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
लोकसभा में लिखित जवाब में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 441.8 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवा निर्यात बढ़कर 421.3 अरब डॉलर पहुंच गया। उन्होंने कहा कि वस्तु और सेवा निर्यात, दोनों ने मिलकर भारत के निर्यात को नई ऊंचाई तक पहुंचाया है।
मंत्री ने बताया कि सरकार वर्ष 2021 के बाद लागू हुए व्यापार समझौतों के तहत मिलने वाले रियायती शुल्क के उपयोग की लगातार निगरानी करती है। इसके लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन और साझेदार देशों के व्यापार आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है।
उन्होंने कहा कि भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) 1 मई 2022 से लागू होने के बाद अब तक 4.45 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि भारतीय निर्यातकों ने शुल्क रियायतों का बड़े पैमाने पर लाभ उठाया है।
यूएई को निर्यात होने वाली एचएस 8-डिजिट स्तर की टैरिफ लाइनों की संख्या वित्त वर्ष 2021-22 के 7,546 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 8,053 हो गई। इन टैरिफ लाइनों के तहत 37.3 अरब डॉलर का निर्यात हुआ। यह 507 नई टैरिफ लाइनों (6.7 प्रतिशत) की वृद्धि को दर्शाता है, जिससे यूएई बाजार में भारत की पहुंच और निर्यात विविधता बढ़ी है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) के तहत अब तक 2.73 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए गए हैं। समझौते से पहले वित्त वर्ष 2020-21 में केवल 1,482 सर्टिफिकेट जारी हुए थे, जबकि समझौते के लागू होने के बाद हर साल औसतन 45,527 सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं।
वित्त वर्ष 2021-22 में ऑस्ट्रेलिया को 5,396 एचएस 8-डिजिट टैरिफ लाइनों के तहत निर्यात होता था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 5,668 टैरिफ लाइनों तक पहुंच गया, जिनका कुल मूल्य 7.2 अरब डॉलर रहा। यानी 272 नई टैरिफ लाइनों के जरिए भारतीय निर्यातकों को अधिक बाजार उपलब्ध हुआ।
भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौते (सीईसीपीए) के तहत भारतीय निर्यातकों ने 1,956 सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन का लाभ उठाया है। मॉरीशस को निर्यात होने वाली एचएस 8-डिजिट टैरिफ लाइनों की संख्या वित्त वर्ष 2021-22 के 3,593 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 4,345 हो गई। इन टैरिफ लाइनों के तहत करीब 473 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ। यह 752 नई टैरिफ लाइनों (20.9 प्रतिशत) की वृद्धि को दर्शाता है।
मंत्री ने बताया कि भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) के तहत मूल्य के आधार पर भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को शुल्क मुक्त पहुंच मिली है, जो ओमान की 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को कवर करता है। यह खाड़ी क्षेत्र में भारत के सबसे व्यापक व्यापार समझौतों में से एक है।
मंत्री के अनुसार, 1 जून 2026 से लागू इस समझौते के बाद अब तक 783 सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए गए हैं। ओमान को निर्यात होने वाली टैरिफ लाइनों की संख्या मई 2026 के 2,879 से बढ़कर जून 2026 में 3,371 हो गई। जून 2026 में इन टैरिफ लाइनों के तहत 622.8 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ, जो मई 2026 के 402.7 मिलियन डॉलर की तुलना में 54.7 प्रतिशत और जून 2025 के 215.1 मिलियन डॉलर की तुलना में 189.6 प्रतिशत अधिक है।
इसके अलावा, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए)-टीईपीए के तहत भारत को 92.2 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर रियायत मिली है, जो भारत के 99.6 प्रतिशत निर्यात को कवर करती है। अक्टूबर 2025 से यह समझौता लागू होने के बाद अब तक 7,885 सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं, जो भारतीय निर्यातकों द्वारा शुल्क रियायतों के प्रभावी उपयोग को दर्शाते हैं।
जितिन प्रसाद ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत द्वारा किए गए एफटीए समझौतों में टेक्सटाइल, चमड़ा और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और ईएफटीए के साथ हुए समझौतों ने भारतीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया है। साथ ही, संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संतुलित रणनीति अपनाई गई है।

