SGSU Advertisement
Home खेल ‘तमाम मुश्किलों के बावजूद यहां से पदक लेकर लौटना था’, एशियन पैरा...

‘तमाम मुश्किलों के बावजूद यहां से पदक लेकर लौटना था’, एशियन पैरा गेम्स में मेडल पर बोलीं तेजल डामोर

0
6

गांधीनगर, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। गुजरात की दृष्टिबाधित धाविका तेजल डामोर ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में महिलाओं की 200 मीटर टी12 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। महाद्वीपीय प्रतियोगिता में पदार्पण करते हुए उन्होंने इस स्पर्धा में अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी किया।

दाहोद जिले की रहने वाली 24 वर्षीय तेजल भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) में प्रशिक्षण लेती हैं। उन्होंने हीट में 25.25 सेकंड का समय निकालकर अपनी दौड़ में दूसरा स्थान हासिल किया और फाइनल के लिए क्वालीफाई किया।

तेजल का यह समय सितंबर में दुबई पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में स्वर्ण पदक जीतते समय दर्ज किए गए उनके 25.47 सेकंड के पिछले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से बेहतर रहा।

तेजल ने अपने पदक का श्रेय कोच नितिन चौधरी को देते हुए कहा कि उनके समर्पण और प्रशिक्षण में अनुशासन ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा, “सबसे पहले मैं अपने कोच को धन्यवाद देना चाहती हूं। इस पदक के पीछे बहुत मेहनत और अनुशासन है। रविवार को आराम का दिन होने के बावजूद मेरे कोच ने प्रशिक्षण में कभी कमी नहीं आने दी। अगर अभ्यास का सत्र तय होता था, तो वह वहां मौजूद रहते थे। मैं सबसे पहले उनका धन्यवाद करना चाहती हूं।”

अपनी चुनौतियों और संघर्षों का जिक्र करते हुए तेजल ने कहा कि वह पदक जीतने के दृढ़ संकल्प के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंची थीं। उन्होंने कहा, “हम यहां बहुत सारी उम्मीदों, कड़ी मेहनत और जीतने के मजबूत संकल्प के साथ आए थे। मेरी यात्रा में काफी संघर्ष रहा है, लेकिन मैंने ठान लिया था कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, मुझे पदक लेकर लौटना है।”

तेजल ने 2022 में पैरा एथलेटिक्स में अपना करियर शुरू किया था। इसके बाद से वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती रही हैं। उन्होंने 2025 में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में छठा स्थान हासिल किया था। इसके बाद 2026 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और सितंबर में दुबई पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

वह गांधीनगर स्थित साई के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में कोच नितिन चौधरी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेती हैं। यहां उन्हें कोचिंग के साथ खेल संबंधी बुनियादी ढांचे और अन्य प्रशिक्षण सुविधाओं का लाभ मिलता है। युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने भी वार्षिक प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता कैलेंडर (एसीटीसी) के तहत तेजल की खेल तैयारियों के लिए 2,05,961 रुपये की वित्तीय सहायता दी है। 200 मीटर में कांस्य पदक जीतने से तेजल का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब उनकी नजर महिलाओं की 400 मीटर टी12 स्पर्धा पर है, जिसे वह एशियन पैरा गेम्स में अपना मुख्य मुकाबला मानती हैं।

तेजल ने कहा कि उन्होंने और उनके कोच ने 400 मीटर की स्पर्धा से पहले आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए 200 मीटर में पदक जीतने की रणनीति बनाई थी। उन्होंने कहा, “मेरी मुख्य स्पर्धा 400 मीटर है, जो अब होने वाली है। मेरे कोच और मुझे लगा था कि 200 मीटर में पदक जीतने से 400 मीटर के लिए हमारा आत्मविश्वास बढ़ेगा। अब इस पदक के साथ मैं अपनी मुख्य स्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने को लेकर और अधिक आत्मविश्वास महसूस कर रही हूं।”

अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों के अलावा तेजल दाहोद में दृष्टिबाधित बच्चों के लिए एक समर्पित रनिंग ट्रैक बनवाना चाहती हैं। उनका मानना है कि ऐसी सुविधा से दृष्टिबाधित बच्चों को एथलेटिक्स में आगे बढ़ने और अपनी खेल प्रतिभा विकसित करने के अधिक अवसर मिलेंगे। एशियन पैरा गेम्स में कांस्य पदक और व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तेजल के अंतरराष्ट्रीय करियर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब वह 400 मीटर टी12 स्पर्धा में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की तैयारी में जुटी हैं।