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गुजरात: द्वारका, अहमदाबाद और राजकोट में जन्माष्टमी पर उमड़ी भारी भीड़

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अहमदाबाद, 4 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी बड़े उत्साह के साथ मनाई जा रही है। राज्यभर के मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों और शोभायात्राओं का आयोजन किया गया। द्वारका और अहमदाबाद सहित प्रमुख तीर्थस्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

द्वारका में हजारों श्रद्धालुओं ने जन्माष्टमी के अवसर पर जगत मंदिर में दर्शन किए।

भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुचारु रूप से दर्शन कराने के लिए मंदिर प्रशासन और पुलिस ने बैरिकेडिंग सहित विशेष इंतजाम किए।

द्वारकाधीश मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। उत्सव का समापन आधी रात को होने वाले जन्मोत्सव के साथ होगा, जो भगवान कृष्ण के जन्म का प्रतीक माना जाता है।

अहमदाबाद के भाडज स्थित इस्कॉन मंदिर में भी सुबह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जन्माष्टमी समारोह में शामिल होने पहुंचे।

वडोदरा के गोत्री स्थित इस्कॉन मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया। यहां श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक कार्यक्रम और प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं।

सूरत में तापी कुबेश्वर महादेव धाम में 2,000 किलोग्राम सब्जियों से बनाया गया शिवलिंग उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहा।

राजकोट में विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित 41वीं भव्य जन्माष्टमी शोभायात्रा निकाली गई।

22 किलोमीटर लंबी इस शोभायात्रा में कई आकर्षक झांकियां शामिल थीं। इनमें 11 एक्टिवा वाहनों पर तैयार की गई अमरनाथ शिवलिंग की विशेष झांकी भी शामिल थी।

उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने विभिन्न धार्मिक स्थलों पर विशेष तैयारियां की थीं।

द्वारका और बेट द्वारका में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के इंतजाम मजबूत किए गए। वहीं, राजकोट में ड्रोन और रियल-टाइम एआई आधारित भीड़ प्रबंधन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान कृष्ण प्रेम, स्नेह, ज्ञान, शक्ति, भक्ति और कर्म के प्रतीक हैं। उन्होंने भगवान कृष्ण को यशोदा के प्रिय बालक और अर्जुन के मार्गदर्शक व सारथी के रूप में याद किया।

मुख्यमंत्री ने कहा, “भगवान कृष्ण ने जीवन को बंधनों में नहीं, बल्कि जागरूकता और उत्साह के साथ जीने का संदेश दिया है।”

उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने भी जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान कृष्ण की बांसुरी और मोरपंख से जुड़ा एक श्लोक साझा करते हुए लोगों को त्योहार की बधाई दी।

इस वर्ष गुजरात में 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जा रही है। श्रद्धालु व्रत रख रहे हैं, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं तथा मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

जन्माष्टमी का मुख्य उत्सव परंपरागत रूप से आधी रात को भगवान कृष्ण के जन्म के अवसर पर होने वाली विशेष पूजा के साथ मनाया जाता है।