गांधीनगर, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। गुजरात सरकार ने आंगनवाड़ियों में बच्चों को दिए जाने वाले गर्म पके भोजन की दैनिक दर में 67 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इसके तहत प्रति बच्चे भोजन की दर 5.10 रुपये से बढ़ाकर 8.50 रुपये कर दी गई है। सरकार इस बढ़ोतरी पर सालाना करीब 80 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च वहन करेगी। इसका उद्देश्य 16.17 लाख से अधिक बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की पोषण गुणवत्ता में सुधार करना है।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने बुधवार को इस फैसले की घोषणा की। यह व्यवस्था राज्य की 53,065 आंगनवाड़ियों में एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना के तहत तीन से छह वर्ष की आयु के बच्चों के लिए लागू होगी।
प्रति बच्चे प्रतिदिन 3.40 रुपये की बढ़ोतरी का उद्देश्य भोजन में विविधता लाना है। इसके तहत दालों, साबुत मूंग, चने, मौसमी हरी सब्जियों और फलों को शामिल करने पर जोर दिया जाएगा।
संशोधित व्यवस्था के तहत पहले से निर्धारित 5.10 रुपये प्रति लाभार्थी प्रतिदिन के खर्च में केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी बराबर बनी रहेगी। वहीं, अतिरिक्त 3.40 रुपये का पूरा खर्च गुजरात सरकार उठाएगी। इससे प्रति बच्चे प्रतिदिन भोजन के लिए कुल राशि 8.50 रुपये हो जाएगी। इस बढ़ोतरी से राज्य पर सालाना लगभग 80 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है।
नई दर के तहत आंगनवाड़ियों में भोजन तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री की स्थानीय स्तर पर खरीद के लिए भी अधिक धन उपलब्ध होगा।
विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, प्रतिदिन की निर्धारित राशि में तुअर दाल के लिए 1.24 रुपये, साबुत चने के लिए 85 पैसे, साबुत मूंग के लिए 1.30 रुपये, गुड़ के लिए 52.5 पैसे, मौसमी हरी सब्जियों के लिए 83 पैसे और फलों के लिए 2 रुपये निर्धारित किए गए हैं।
इसके अलावा मूंगफली या तिल के लिए 65 पैसे, मसालों के लिए 60 पैसे और स्थानीय परिवहन के लिए 50 पैसे का प्रावधान किया गया है। साप्ताहिक गर्म भोजन के मेन्यू में साबुत मूंग को भी शामिल किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत बच्चों को सुबह 11 बजे गर्म नाश्ता और दोपहर 1:30 बजे गर्म भोजन दिया जाएगा। मेन्यू में उबली हुई या अंकुरित मूंग, गाढ़ी तुअर दाल, सब्जियों वाला पुलाव, हरी सब्जियों से बनी मुठिया, मसालेदार चने, चावल और सब्जियों के साथ मूंग तथा मौसमी फल शामिल हैं।
इसके अलावा बच्चों को शीरा, सुखड़ी, लौकी का ढेबरा, गुड़ का पुडला, भाखरी, ढोकला और इडली जैसे व्यंजन भी दिए जाएंगे।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने कहा कि संशोधित व्यवस्था के तहत भोजन के लिए अधिक वित्तीय सहायता देने के साथ-साथ मेन्यू में विविधता लाई जाएगी। इसके अलावा खाद्य सामग्री की स्थानीय स्तर पर खरीद की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री मनीषा वकील के मार्गदर्शन में लिया गया है। विभाग ने भोजन तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्री की मात्रा और उसकी लागत का विस्तृत ब्योरा भी जारी किया है।
नई दर से प्रत्येक बच्चे के दैनिक भोजन के लिए उपलब्ध राशि बढ़ेगी, जबकि पहले से निर्धारित राशि में केंद्र और राज्य सरकार के बीच 50-50 फीसदी खर्च साझा करने की व्यवस्था जारी रहेगी। अतिरिक्त खर्च पूरी तरह गुजरात सरकार उठाएगी, जिससे केंद्र सरकार के मौजूदा वित्तीय योगदान में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
