गांधीनगर, 19 फरवरी (आईएएनएस)। गुजरात के वेरावल में 20 फरवरी को भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मछली पकड़ने के लिए एक्सेस पास फ्रेमवर्क का शुभारंभ किया जाएगा। उन्होंने इसे ईईजेड नियमों के 2025 में मत्स्य पालन के सतत दोहन को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
इस फ्रेमवर्क का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह करेंगे, जिनके पास मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्रालय का प्रभार है।
मंत्रालय ने कहा कि भारत के पास लगभग 11,099 किलोमीटर की तटरेखा और लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) है, जो एक विशाल और विविध समुद्री संसाधन आधार प्रदान करता है। यह व्यापक समुद्री क्षेत्र भारत की प्राकृतिक संपदा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और सतत मत्स्य पालन विकास, आजीविका सृजन, खाद्य सुरक्षा और निर्यात वृद्धि के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करता है। भारत वर्तमान में विश्व स्तर पर मत्स्य पालन और जलीय कृषि का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है, और वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत ने लगभग 62,408 करोड़ रुपये मूल्य के समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात किया।
वर्तमान में अधिकांश मछली पकड़ने की गतिविधियां तटरेखा से 40-50 समुद्री मील तक ही सीमित हैं, जबकि 12 से 200 समुद्री मील तक फैला विशाल ईईजेड क्षेत्र, टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों की प्रचुरता के बावजूद, अब तक कम उपयोग में रहा है।
इस अप्रयुक्त क्षमता के दोहन हेतु तथा केंद्रीय बजट 2025-26 की घोषणा के अनुपालन में भारत सरकार ने ईईजेड में मत्स्य पालन के लिए एक मजबूत कानूनी एवं संस्थागत ढांचा प्रदान करने के उद्देश्य से 4 नवंबर 2025 को प्रादेशिक जल, महाद्वीपीय शेल्फ, विशेष आर्थिक क्षेत्र तथा अन्य समुद्री क्षेत्र अधिनियम, 1976 (अधिनियम 80, 1976) के अंतर्गत “विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मत्स्य पालन का सतत दोहन नियम, 2025” अधिसूचित किए थे। साथ ही, मत्स्य पालन और जलीय कृषि में पता लगाने की क्षमता पर एक राष्ट्रीय ढांचा भी विकसित किया गया है।
ईईजेड नियमों की एक प्रमुख विशेषता ईईजेड में अधिकृत मछली पकड़ने के कार्यों के लिए एक पारदर्शी और कानूनी रूप से समर्थित ‘एक्सेस पास’ ढांचे की शुरुआत है। यह ढांचा और ‘एक्सेस पास’ भारतीय मछुआरों को उच्च मूल्य वाले संसाधनों तक पहुंच प्रदान करेगा, ट्रेसेबिलिटी एवं प्रमाणन जैसे निर्यात मानकों को पूरा करने में सक्षम बनाएगा तथा मत्स्य मूल्य श्रृंखला में उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा।
यह शुभारंभ भारत के ईईजेड में अपतटीय मत्स्य पालन के लिए एक पारदर्शी, सतत और मछुआरा-केंद्रित प्रबंधन ढांचे को कार्यान्वित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह भारत के तटीय-निर्भर मत्स्य पालन से एक सतत और भविष्य के लिए तैयार अपतटीय मत्स्य पालन व्यवस्था की ओर संक्रमण का प्रतीक है, जिसका उद्देश्य गहरे समुद्र के संसाधनों की अप्रयुक्त क्षमता को सामने लाना, मछुआरों की आय बढ़ाना, समुद्री खाद्य निर्यात को मजबूत करना और एक समृद्ध एवं समावेशी नीली अर्थव्यवस्था के राष्ट्रीय विजन को आगे बढ़ाना है।

