Sunday, June 7, 2026
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सेना प्रमुख की ऑस्ट्रेलिया यात्रा, दोनों देशों के बीच एक मजबूत रणनीतिक पहल

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नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया की धरती पर भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की मौजूदगी केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि एक मजबूत रणनीतिक पहल साबित हुई है।

कैनबरा स्थित रसेल कार्यालय में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सजी हुई सैन्य टुकड़ियों और सैन्य बैंड के बीच हुआ यह स्वागत भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा रिश्तों की गहराई को दर्शा रहा था। ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑस्ट्रेलिया के चीफ ऑफ ज्वाइंट ऑपरेशंस, वाइस एडमिरल जस्टिन जोन्स से मुलाकात की। यह ज्वाइंट ऑपरेशंस कमान मुख्यालय में हुई।

ज्वांइट ऑपरेशंस केंद्र में उन्हें एकीकृत कमान एवं नियंत्रण संरचना, रियल टाइम ऑपरेशनल निगरानी और त्वरित समन्वय प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई।

गौरतलब है कि सेना प्रमुख ऑस्ट्रेलिया की आधिकारिक यात्रा पर थे। गुरुवार को उनकी ऑस्ट्रेलिया यात्रा का यह अंतिम पड़ाव था। यह यात्रा 16 फरवरी को प्रारंभ हुई थी और 19 फरवरी तक जारी रही। इस दौरान सेना प्रमुख ने ऑस्ट्रेलिया के रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अलग-अलग महत्वपूर्ण वार्ताओं में हिस्सा लिया।

गुरुवार को सेना प्रमुख की भेंट ऑस्ट्रेलिया के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सिस, एडमिरल डेविड जॉनस्टन से भी हुई। दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों, सामरिक समन्वय और भविष्य की संयुक्त तैयारियों पर गंभीर विचार-विमर्श किया।

यह स्पष्ट संकेत मिला कि दोनों देश केवल संवाद तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि ठोस ऑपरेशनल तालमेल की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल साइमन स्टुअर्ट से मुलाकात भी इस यात्रा का अहम पड़ाव रही।

विशेष बात यह रही कि दोनों अधिकारी वर्ष 2015 में संयुक्त राज्य अमेरिका के मिलिटरी वॉर कॉलेज के सहपाठी रह चुके हैं। यह साझा सैन्य पृष्ठभूमि अब दोनों सेनाओं के बीच रणनीतिक समझ और विश्वास को और मजबूती दे रही है। वार्ता में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग, संयुक्त अभ्यासों के विस्तार और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर साझा दृष्टिकोण पर जोर दिया गया।

दौरे का भावनात्मक क्षण तब आया जब जनरल द्विवेदी ने ऑस्ट्रेलियाई युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया और ‘लास्ट पोस्ट’ समारोह में भाग लिया। शहीद सैनिकों को दी गई यह श्रद्धांजलि केवल औपचारिकता नहीं थी, बल्कि उन मूल्यों की पुनर्पुष्टि थी जो दोनों देशों की सेनाओं को जोड़ते हैं।

सेना प्रमुख ने शहीदों के प्रति सम्मान व समर्पण का परिचय दिया। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह यात्रा साफ संदेश देती है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा संबंध अब नए चरण में प्रवेश कर चुके हैं। यह वह स्तर है जहां साझा रणनीति, संयुक्त तैयारी और गहरा विश्वास भविष्य की साझेदारी की नींव बन रहे हैं।