मुंबई, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। दुबई के नॉर्ड एंग्लिया इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाई कर रहे 17 साल के रेहान चौधरी भारत में महिलाओं के लिए वित्तीय शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। वर्ष 2025 में उनके द्वारा शुरू की गई पहल ‘द प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट’ के माध्यम से पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में अब तक 420 लोगों तक पहुंच बनाई गई है। इसके तहत आयोजित कार्यशालाओं में बजट बनाने, बचत करने, कर्ज लेने और वित्तीय धोखाधड़ी को पहचानने जैसे रोजमर्रा के वित्तीय फैसलों से जुड़े विषयों को शामिल किया गया है।
इस पहल का विचार शंपा के साथ बातचीत के दौरान आया, जो जन्म से ही रेहान की देखभाल कर रही हैं। उनके परिवार के साथ हुई वित्तीय धोखाधड़ी के बारे में जानने के बाद रेहान ने विचार किया कि वित्तीय जागरूकता बढ़ाकर लोगों को अपनी बचत सुरक्षित रखने और पैसों से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेने में कैसे मदद की जा सकती है।
वित्त के प्रति उनकी रुचि शुरुआत में अपनी जानकारी बढ़ाने तक सीमित थी, लेकिन बाद में यह व्यावहारिक वित्तीय शिक्षा पर केंद्रित एक पहल में बदल गई। रेहान ने ‘नोइंग योर मनी’ नाम से 10 मॉड्यूल वाला पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तक तैयार की, जिसमें परिचित परिस्थितियों और आसानी से समझ आने वाले उदाहरणों के जरिए वित्तीय अवधारणाओं को समझाया गया है।
द प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट के संस्थापक रेहान चौधरी ने कहा, “मैं वित्तीय शिक्षा को व्यावहारिक और लोगों के रोजमर्रा के जीवन में लिए जाने वाले फैसलों के लिए प्रासंगिक बनाना चाहता था। यह केवल यह जानने के बारे में नहीं है कि पैसा कैसे काम करता है, बल्कि सही सवाल पूछने, इसमें शामिल जोखिमों को समझने और अपने पैसों के बारे में सोच-समझकर फैसले लेने में सक्षम होने के बारे में भी है।”
इस पाठ्यक्रम में बजट बनाना, वेतन, बचत, कर्ज लेना, निवेश, डिजिटल भुगतान, वित्तीय धोखाधड़ी और आपातकालीन परिस्थितियों के लिए योजना बनाना शामिल है। कार्यशालाओं में व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से घरेलू खर्चों का हिसाब रखने, कर्ज चुकाने की शर्तों की तुलना करने, वित्तीय प्रस्तावों का आकलन करने, बैंकिंग संबंधी जानकारी सुरक्षित रखने और विभिन्न वित्तीय उत्पादों से जुड़े जोखिमों को समझने के तरीके बताए जाते हैं।
इस पहल की शुरुआत पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में बंधन-कोन्नगर के सहयोग और बंधन बैंक के समर्थन से आयोजित कार्यशालाओं के साथ हुई। इसके बाद बंगाल सृष्टि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड और फीड के माध्यम से इसका विस्तार आसनसोल तक किया गया। इस कार्यक्रम को महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित इंडो काउंट के कार्यस्थल तक भी पहुंचाया गया, जहां आयोजित कार्यशालाओं में 200 महिलाओं ने हिस्सा लिया।
द प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, इन सहयोगों के माध्यम से पहल अब तक कुल 420 प्रत्यक्ष प्रतिभागियों तक पहुंची है। इनमें बंधन-कोन्नगर के माध्यम से 40, बंगाल सृष्टि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड के जरिए 70, फीड के माध्यम से 110 और इंडो काउंट के जरिए 200 प्रतिभागी शामिल हैं।
इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन’ (सीआरपी) मॉडल है, जिसका उद्देश्य कार्यशालाओं से आगे भी सीखने की प्रक्रिया को जारी रखना है। रेहान ने बंधन और बंगाल सृष्टि के सहयोग से 40 सीआरपी को प्रशिक्षण दिया है, ताकि वे इस अध्ययन सामग्री को अन्य लोगों तक पहुंचा सकें। ये सीआरपी भी 420 प्रत्यक्ष प्रतिभागियों में शामिल हैं, जबकि उनके जरिए बाद में शिक्षा प्राप्त करने वाले लोगों को इस संख्या में शामिल नहीं किया गया है। परियोजना के तहत शिक्षण वीडियो, कई भाषाओं में अध्ययन सामग्री और एक वेबसाइट भी तैयार की गई है, ताकि प्रतिभागी और प्रशिक्षक पाठ्यक्रम को दोबारा देख सकें।
कार्यशालाओं को विभिन्न समूहों की भाषा और परिस्थितियों के अनुसार तैयार किया जाता है। सत्र हिंदी और अंग्रेजी में आयोजित किए जाते हैं, जबकि जरूरत पड़ने पर स्थानीय टीमें भाषा संबंधी सहायता उपलब्ध कराती हैं। इंडो काउंट में स्थानीय सहयोग से मराठी अनुवाद की सुविधा प्रदान की गई।
इस कार्यक्रम में प्रशिक्षण से पहले और बाद में आकलन भी किया जाता है, ताकि प्रतिभागियों की विषयों को समझने की क्षमता का मूल्यांकन किया जा सके और उन अवधारणाओं की पहचान हो सके जिन्हें और विस्तार से समझाने की जरूरत है। रेहान ने प्रतिभागियों के जवाबों का मिलान करने, आकलन के अंकों की गणना करने और आंकड़ों को व्यवस्थित करने के लिए एक सहायक प्रणाली विकसित की है।
अनुवर्ती आकलन के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि प्रतिभागियों को कितनी जानकारी याद रहती है और क्या वे अपने दैनिक जीवन में सीखी गई बातों को लागू कर रहे हैं। इसके प्रभाव से संबंधित एक रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रिपोर्ट और परिणामों से जुड़े विस्तृत निष्कर्ष अलग से साझा किए जाएंगे और परियोजना की वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाएंगे।
द प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट की योजना अतिरिक्त सामुदायिक संगठनों और नियोक्ताओं के साथ मिलकर अपने काम का विस्तार करने की है। इसमें स्थानीय जरूरतों के अनुरूप शिक्षण, प्रशिक्षकों की तैयारी और प्रशिक्षण के बाद सीखने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दीर्घकालिक उद्देश्य यह है कि महिलाओं के साथ काम करने वाले संगठन इन संसाधनों का इस्तेमाल कर सकें और स्थानीय प्रशिक्षकों को अपने समुदायों तथा कार्यस्थलों पर वित्तीय शिक्षा जारी रखने में सक्षम बना सकें।
यह पहल वित्तीय समावेशन के एक महत्वपूर्ण पहलू को सामने लाती है। वित्तीय सेवाओं तक पहुंच होना इसका केवल एक हिस्सा है। इन सेवाओं का इस्तेमाल करना, उनसे जुड़े जोखिमों का आकलन करना और सोच-समझकर वित्तीय फैसले लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कार्यशालाओं और समुदाय आधारित दृष्टिकोण के जरिए द प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट महिलाओं को व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है, ताकि वे अपने वित्तीय विकल्पों को बेहतर ढंग से समझ सकें और अपने पैसों का प्रबंधन कर सकें।
